सपनों की उड़ान

सपनों की उड़ान

जानवी जो एक छोटे से कस्बे में रहती थी।

जिसे कला में बहुत रुचि थी। वह घर पर पड़े फालतू की वस्तुओं से कुछ भी अच्छा सा ग्रह सज्जा के लिए बना दिया कर थी।

उसकी कलाकारी को देख कर ऐसा प्रतीत होता था, जैसे स्वयं भगवान की देन हो, वाकई में यह भगवान की ही देन थी।

स्कूल में उसकी कला को देख कर सब बहुत खुश हो जाया करते थे।

खास कर उसकी कला की अध्यापिका वो तो रोज उसकी कॉपी को देखा करती थी।

जब वह दस साल की थी तब उसके एक रिश्तेदार के भाई ने जानवी से पूछा, तुम्हारा प्रिय विषय कौन सा है?

तब उसने बोला मेरे प्रिय विषय कला है।

मुझे कला बनाना और उनमें रंग भरना अच्छा लगता है।

उसकी यह बात सुनकर उसके भाई ने उसको बोला कि

“तुम अपना प्रिय विषय अंग्रेजी या विज्ञान को चुनो कला में कुछ नही है, अगर भविष्य अच्छा चाहती हो तो इन विषय पर ध्यान देने की जरूरत है।”

भाई की इस बात को सुनकर उसका मन उदास हो गया ।

वो मन ही मन ये सोचने लगी कि क्यों कला विषय को लोग ज्यादा महत्व नही देते?

क्यों उसे एक अच्छे विषय के रूप मे नही देखते है?

अगर देखा जाए तो हमारे आस–पास की हर एक वस्तु कलात्मक है हर एक वस्तु कला का ही रूप है।

वो मन में इस तरह सोच कर खुद को शांत कर लेती है, आखिर बोल भी क्या सकती थी बच्ची ही तो थी तब।

देखते–देखते उसने अपना मैट्रिक पास कर लिया।

तब एक बार उसने अपने घर में मम्मी–पापा को बोला कि उसको कला के क्षेत्र में ही कुछ करना है;

परंतु घर की स्थिति के कारण उसको माना कर दिया और वो एक बार फिर खुद को समझा कर शांत हो गई।

इस तरह से उसकी शिक्षा आगे चलती रही और उसने स्नातक की डिग्री पूर्ण कर ली।

परंतु उसका मन तो अब भी कला में ही लगा था।

घर की स्थिति को देखते हुए उसने बच्चों को पढ़ना आरंभ कर दिया और पढ़ाई बंद कर दी क्योंकि, उसका ज्यादातर मन तो कला में ही लगता था।

ऐसे उसने दो साल तक पढ़ाई छोड़ दी सिर्फ बच्चों को ही पढ़ाया।

और एक दिन उसको पता चला की कला से मास्टर डिग्री प्राप्त की जा सकती है।

फिर क्या वो बहुत खुश हुई और यह बात अपने एक मित्र को बताई उसके मित्र ने भी उसकी इस बात को सुना और उसका दाखिला करवाने में उसकी सहायता की।

उसने इस बात को मम्मी–पापा को बताया उन्होंने दूसरे शहर जाने को मना कर दिया क्योंकि बात खर्चे की थी।

परन्तु उसने दो साल में बच्चों को पढ़ा कर इतना कमा लिया था की वह अपना दाखिला करवा ले।

जैसे तैसे घरवाले भी मान गए और दूर शहर एक सरकारी कॉलेज में दाखिला हो गया।

फिर कुछ समय बाद परिवार की तरफ से भी उसे खर्चा मिलने लगा और उसने मन लगा कर पढ़ाई की।

अपने गुरु के द्वारा दी हुई शिक्षा को उससे अच्छे से ग्रहण किया।

एक सफल और अच्छा कलाकार बनना उसका सपना बन गया।

कला में सर्वाधिक अंक प्राप्त करके उसे स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया और अपनी मास्टर डिग्री को पूर्ण किया।

उसका एक सपना सच हो गया।

उसने लोगों की सोच को बदल दिया की

एक व्यक्ति के लिए विषय महत्वपूर्ण नही बल्कि उस विषय में ज्ञान और सफलता महत्वपूर्ण होती है।

आज वह एक अच्छी कलाकार होने के साथ–साथ एक अध्यापिका भी है।

Image by S. Hermann & F. Richter from Pixabay

और कहानियां पढें : शब्दबोध कथांजलि

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About वाणी गुप्ता 5 Articles
वाणी गुप्ता, उरई, उत्तर प्रदेश शिक्षा - ड्राइंग एंड पेंटिंग (इंदौर), बैच 2018 रुचि - ड्रॉइंग, पेंटिंग, क्राफ्ट, कविता लेखन। वर्तमान कार्य - प्राइवेट ड्रॉइंग अध्यापिका
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