पिता

28 फ़रवरी, 2021 ममता कानुनगो 0

पिता — संबल और विश्वासउष्णता मे शीतलता का एहसास,,प्रतिकुलता मे आत्मविश्वास जगाते,,,अनुकूलता मे स्वावलंबन का पाठ पढा़ते,,,,हृदय की विषमता को हरनेस्नेह से मुझे गले लगाते, […]

अंजुरी – घनाक्षरी

28 फ़रवरी, 2021 ममता कानुनगो 0

अंजुरी में भर स्नेह,लागी श्याम संग नेह,दधि माखन मिश्री से,कान्हा को रिझाए रही। मन में बसे मुरारी,गोवर्धन गिरधारीचरण धूलि पाकर,आनंद पाए रही। चहक रही चांदनी,महक […]

और शाम ढल दी

28 फ़रवरी, 2021 विनीता बर्वे 0

और शाम ढल दी….जी भर निहारा न था,और घड़ियां चल दी।नैनों से नैन भी न मिल पायें,और रश्मियाँ चल दी। किरणें ज्यों-ज्यों ठंडी हो चली,समय […]

बौराने का आनंद

28 फ़रवरी, 2021 माया कौल 0

माह में मधु का प्रवेश हो रहा है, और जीवन में बसंत का उद्भव,, कामदेव ,,,,,,अपनी सज धज में मगन है,उनकी भावनाएंलता, फूल, पेड़, सब […]

खिलखिलाता बसंत

25 फ़रवरी, 2021 माया कौल 0

बसंत ढेर से रंगों को ,मन में घोल देता है ,,केवल घोलता ही नहीं है,उन रंगों को बिखेर देने को ,आतुर भी दिखता है,कुछ रंग […]

अपराजिता

25 फ़रवरी, 2021 सुषमा शर्मा 0

मेरा जीवन है,हिरनी जैसाउन्मुक्त भरती कुलाँचे,बन-बन भटकती रही,हारी हूँ ना अभी,आगे भी ना हारूँगी।में नारी भारत की,कर्मठ,कठोर ,प्रतिज्ञाओं की पूर्णता हेतु,परीक्षा दे,तारामती भी,अपराजिता बन,गौरवगाथा बननारी […]

ढाई आखर प्रेम का

25 फ़रवरी, 2021 सुषमा शर्मा 1

चल “पडी” थी “जिन्दगी”बे रोक-टोक सुहानी सी,भर लिए थे”आँचल”में,कुछ पल आनंद के,ढाई आखर प्रेम का पढ़कर।ना कोई है अपना,ना था कोई बेगाना,ना है उम्मीद किसी […]

मेरा बसन्त

सखी वसंत ऋतु आई

25 फ़रवरी, 2021 शांता गीते 0

सखी वसंत ऋतु आईजग मऽ खुशहाल छाईमन भावना ऋतु आईसखी मन मऽ उमंग भरी लाईसखी वसंत ऋतु आईमोर नाच्या, कोयल कूकीभवंरा न ताने सुणाईऋतुराज का […]

मर्यादा

22 फ़रवरी, 2021 वीणा मंडलोई 0

जीजी क्यों ,झेल रही हो ,इतने सालों से ?तुम्हें गुस्सा नहीं आता ?नई बहू ,,खीझ रही थी अपनी जेठानी पर ।गुस्से और ,घिन से उबल […]

नर्मदा

नर्मदे हर

जय माँ नर्मदा अमरकंटक से निकली सहस्त्रनामसे जानी जातीनिर्मल जल ले कल कल बहती हर दिशा में…नजर आतीपापियों के पाप धोए दर्शन दे संतोंका मान […]

बसंत

बसंत पंचमी – पूजन और महत्त्व

9 फ़रवरी, 2021 प्रभा शुक्ला 1

ऋतुराज का स्वागत, देवी सरस्वती प्राकट्य हिन्दू कैलेंडर के ग्यारहवें महीने “माघ” मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसन्त पंचमी कहते हैं। हमारे यहाँ […]

किताबें

बौद्धिक विकास में सहायक किताबें

9 फ़रवरी, 2021 डॉ. भावना बर्वे 3

पढ़ने की प्रक्रिया से संवादों को उचित रूप से बोलने की आदत आत्मविश्वास का निर्माण करती है, और साथ ही जिज्ञासा जैसे भावों को भी जन्म देती है।पढ़ने की प्रक्रिया से ..

मेरा बसन्त

मेरा बसन्त

9 फ़रवरी, 2021 प्रभा शुक्ला 1

सुन री सखीआज आँगन में कागा कांव कांव बोला।मन हरष उठा,आएगा कोई अपना प्यारा।री सखी बता दे कौन है वो। उसके आने की आहट हवाओं […]

आनंद

माघ

9 फ़रवरी, 2021 विभा भटोरे 0

माघ माह अलबेला है,आज तू ना अकेला हैजा रहे है आमजन,तू भी चल आनन्द की बेला है।स्नान का पर्व भी होता है!!!देख संतों का रेला […]

alone

मज़बूरी

खन्ना के घर पर गहरा सन्नाटा छाया हुआ था | एक दम हष्ट पुष्ट दिखने वाले खन्ना जी को अचानक कोरोना वाइरस ने अपने चपेटे […]

दिशा

नई दिशा

9 फ़रवरी, 2021 किरन केशरे 0

शैली किचन में से पूछते हुए निकली ,…..आज क्या बनाऊँ शाम के खाने में ? उसने देखा पति निलेश बालकनी में कुछ गम्भीर सोच में […]

शगुन

सवाया

9 फ़रवरी, 2021 वीणा मंडलोई 1

तनु ने निमंत्रण पत्रिका माँ-बाबूजी को दी और पैर छुए ।बेटी की शादी में आने की मनुहार की।माँ बाबूजी दोनों गदगद हो रहे थे, नातिन […]

भँवरा

मोक्ष

9 फ़रवरी, 2021 वीणा मंडलोई 0

आँखें खोलते ही ,नन्हा भँवराऊपर देखता है ,एक रोशनी उसे बुलाती हैवो उड़ान भरता है ,ज्यादा ऊँची नही ,,बस थोड़ा ही ऊपर ,खुश हो नीचे […]

mask

क्या कहे बीता साल क्या ले गया

किसी बूढ़ी आखों की उम्मीदेंकिसी युवा की ख्वाइशें ।क्या क्या नही ले गया।कहने को पूरा साल था ,लेकिन करने को कुछ नही किया।छोटे छोटे नन्हे […]

मनोकामना

मनोकामना

9 फ़रवरी, 2021 विनीता बर्वे 0

किशोरवय ‘कामना’ कभी डॉक्टर, कभी एयर होस्टेस, कभी अभिनेत्री तो कभी करोडपति बनने वाली युवतियों ,महिलाओं की आए दिन आने वाली खबरों से प्रेरित होकर […]

ज़िंदगी की उधेड़बुन

8 फ़रवरी, 2021 संगीता बर्वे 0

ज़िंदगी की सलाइयो मेंउनचास फंदे डालेकुछ उलटे बुने कुछ सीधेकई बिना बुने उधेड़ डालेइस उधेड़बुन ने अनजाने हीकईं पेटर्न बना डालेकुछ फंदे एक से दूसरी […]

मेरा मन

मेरा मन बहुत ही छोटा शब्दलेकिन उड़ान लिए ,बचपन से किशोरावस्था तकगुड़ियों के खेल से घर गृहस्थी तक चलता ही रहता ।कभी मन की होती […]

बाल

बाल मजदूरी

मन चंचल मन बावरा मनसमझ ना पाएखेलने की उम्र में बालक बोझ ढोतानजर आएयह कैसी मजबूरी बचपन हाथों सेनिकला जाएकर में किताब की जगह बोझ […]

जीवन (जी-वन)

8 फ़रवरी, 2021 वाणी गुप्ता 2

हमारा जीवन उस वन की तरह है।जिसमे सब कुछ है हरा-भरालेकिन फिर भी है सुनसान और अकेला ||जिसके एक पल चमकती धूप,तो अगले पल घना […]

समर्पण

नारी। जीवन का मंत्र है समर्पणजिसने स्वयं का सर्व स्व किया अपर्णहर भाव है निश्छल आया न किया न कभी छलत्याग की मूर्ति सेवा में […]

मैं किसे बताऊं

मैं किसे बताऊं

8 फ़रवरी, 2021 पूर्वा शुक्ला 0

सबकी परेशानियों को सुन लूंपर अपनी परेशानी किसे सुनाऊं सबके दर्द की दवा बताऊंपर अपना दर्द मैं किसे दिखाऊं सबके होठों पर मुस्कुराहट लाऊंपर मेरी […]

बसंत

मेरे शहर बसंत आयालहराता मुस्कुरा कर आया पिय से मिलने की सौगात लाया देखकर एक दुजे की हंसी हुई मंदउर में भरी सुंदर स्पद प्रिय […]

वर्ण पिरामिड – शमा, पतंग

विषय: शमा येशमाजलकेदिखाएगीगम के तममे डूबे इंसानको राह बताएगी विषय: पतंग मॉसखासंग मेपतंग लेखूले आसमातले यू उडाउनव वर्ष मनाऊं Photo by Abhishek Upadhyay on Unsplash

अनुशासन और स्वरचित रचनाएं

बच्चें अनुशासन सदैव अपने बड़ों से सीखते हैं।घर के माहौल और बड़ों की दिनचर्या का बच्चों पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। माता पिता द्वारा […]

मानवता

8 फ़रवरी, 2021 मेधा जोशी 0

मानवता यह शब्द अपने आप में मनुष्य हर मानव मात्र का अलंकार है, जो कि मानव सभ्यता की शोभा और गरिमा का द्योतक हैं। एक […]

लांडी को जीव हांडी म

8 फ़रवरी, 2021 विभा भटोरे 1

मैंने सुना कुछ बड़बड़ा रही थी सासू माँ,जीव हांडी म रह्यज।पूरा नहीं सुन पाई।डरते हुए मैंने पूछा —क्या हुआ मम्मीजी?आपने कुछ कहा?हाँ!!!लांडी को जीव हांडी […]

बेटी और माँ क्षणिका

क्षणिका – बेटी और माँ

8 फ़रवरी, 2021 ममता कानुनगो 0

बेटी जीवन प्रभा है वो,अंतर्मन की कथा,मर्यादा त्याग समर्पण,बेटी स्नेह बंधन। मां प्यार स्पंदन,महकता चंदन,पवित्र शीतल मन,सलिल सरिता सी,मां तुम अनुपम। Photo by Raghavendra V. […]

बसंत

बसंत

8 फ़रवरी, 2021 सुभाष शर्मा 0

खिल उठी सूर्य किरण,लाली लेकर जागी भोर।बागिया में बोले पपिहा,अमराई में नाच उठे मोर। ओढ़ के दुशाला बासंती,पवन चली लेकर मस्ती।महक उठा जग ये सारा,फूल […]

bachpan

बचपन की यादें

8 फ़रवरी, 2021 पूर्वा शुक्ला 0

खेत के खलियानों के बीच बचपन बितानाछोटी-छोटी खुशियों से जीवन को सजानामाँ की गोद मे ज़न्नत मिल जानाबाबा के प्यार और दुलार से गमों को […]

स्वेटर में बच्चे

बाल गोपाल, करते धमालसुंदर से, न्यारे से, लाल स्वेटर में बच्चेजैसे कोई खिलता हुआ गुलाब,इतना लाजवाबकि कोई सुंदर ख्वाबहमारी आंखों के सामने…लगता है नाचने..बच्चों की […]

प्रार्थना

रक्षा-प्रार्थना

क्या अर्वाचीन और क्या प्राचीनक्या उत्तर और क्या दक्षिणक्या शासक और क्या आधीनक्या नगरीय और क्या ग्रामीणहर क्षण होता प्रकाश क्षीण॥ हाहाकार बढ़ता हर दिनदेव […]

दिव्य महापुरुष – स्वामी राम कृष्ण परमहंस जी

श्री रामचंद्र व भगवान बुद्ध को छोड़कर अवतारी पुरुषों का जन्म संकटग्रस्त परिस्थितियों में ही हुआ है। वैसे ही रामकृष्ण जी भी किसी विशेष सुखद …

नातरा

जमुना अपने पति के साथ बस में चढ़ी, पति ने खाली सीट देखकर उससे कहा यहां बैठ जा ये सीट खाली है। मैं अभी आता […]

दुल्हन

दुल्हन – ओढ़ के लाल चुनरिया

ओढ़ के लाल चुनरियाचली दुल्हन ससुरालमाथे पर बिंदिया चमकेहाथ चूड़ियां खनके लालओढ़ के लाल चुनरिया मेहंदी का रंग लिए हाथ मेंकजरारी आंखें मे संजोए सपनेछोड़ […]

खुद के भरोसे

भरोसा

7 फ़रवरी, 2021 अनिता शुक्ला 0

चल पड़े थे सुनसान राहों पर ,जहां अंधेरों ने ही घेरा थाउजियारे की कोई उम्मीद न थीएक भरोसा खुद पर थाउसी भरोसे के सहारे चले […]

जवान

वतन है जान

7 फ़रवरी, 2021 अनिता शुक्ला 0

दामोदर इस बार लम्बी छुट्टी मिली है ,कब जा रहा है घर ? नहीं अन्ना इस बार नहीं जाना, हमारे जाते ही सरहद पर दुश्मनों […]

बिटिया चली ससुराल

करके श्रृंगार बिटिया चली ससुराल

करके सोलह श्रृंगार मेरीबिटिया चली है ससुरालवह नन्हीं सी कली अबफूल बन गई मेरी बगियाछोड़ अपने चमन को चली जहां भी जाएगी अपनीमहक से सबका […]

पिता का डर

डर

4 फ़रवरी, 2021 सुषमा चौरे 0

“ये क्या किया शंकर तुमने, मकान बेचकर तीस लाख बेटे के हाथ में रख दिए! इतना भरोसा ठीक नहीं औलाद पे ।” दोस्तो की बातें […]

ऋषि

हमारी धरोहर ‘ऋषि’

4 फ़रवरी, 2021 विनीता बर्वे 0

‘ऋषति-गच्छति संसारपारं इति ऋषि:।’ यह ऋषि की व्याख्या है।ऋषि की बुद्धि ईश समर्पित होने से ऋषि चिंतन में मानव को बदलने की शक्ति होती है। […]

वात्सल्य

वात्सल्य

4 फ़रवरी, 2021 ममता कानुनगो 0

“मनु ये क्या कर रही है, क्यों आंगन में चावल बिखरा रही है” – नानी ने कहा। मनु बोली- “नानी पेड़ पर चिड़िया के छोटे-छोटे […]

तुम बिन माँ

माँ

4 फ़रवरी, 2021 सुधा केशरे 0

माँतुम बिनकौन कहेगा अबआजा बेटीमायके कौनजोहे बाटद्वार पर रखेंनयन प्यारभरें कौनपूछे अबसकुशल हो नाअपने घरसपरिवार कौनदे आशीषभरे मेरी झोलीरखे हाथमस्तक माँतुम बिनसुने लगे सारेतीज त्यौहारसंसार […]

संदूक का रहस्य

रहस्य

4 फ़रवरी, 2021 मेधा जोशी 0

एक गांव में एक बुढ़िया अपने बेटे के साथ रहती थी। उसके पास एक संदूक रखा होता था वह कभी उस संदूक को हाथ लगाने […]

प्रकृति

प्रकृति

4 फ़रवरी, 2021 मेधा जोशी 0

फूलों को खिलखिलाता देख,मन मेरा मुस्काया, देख सरित प्रवाह,सुकुन मैंने पाया, ये फुहारें सावन की,जैसे बूंदों की पायल, मन मयूर नाच रहा,अरुष प्रभात जाग रहा, […]

सपनों की उड़ान

उड़ान सपनों की

ख़्वाबों के परिंदों, चल पड़ो उस डगरजहाँ मयस्सर हो तुम्हारे सपनों का सफ़र वहशत न रखना की रास्ता पथरीला हैं,चलना शुरू करो तो हर सफ़र […]

बरगद का पेड़

बरगद

4 फ़रवरी, 2021 पूजा करे 1

मैंने ही इन्हें गाँव से बुलाकर मुसीबत मोल ले ली, किस घड़ी में इन्हें दया करके यहाँ ले आई । इन शब्दों को बड़बड़ाते हुए […]

याद सताती है

एहसास

समंदर की लहरें जब भीमुझसे टकराती है ,तब तब मुझे तेरीयाद सताती है । लहराती हवा जबमहसूस करता हूँ मैं ,तू झूमती हुईनज़र आती है […]

आज कुछ अलग हो

आज कुछ अलग हो

3 फ़रवरी, 2021 सुषमा चौरे 0

आज कोई काम हाथ में मत लो। बरामदे में रखी कुर्सी पर बैठो, और लकड़ी की मेज़ पर पैर फैला लो,और तब तक बैठो जब […]

कुमकुम

सुरक्षा कवच

3 फ़रवरी, 2021 सुषमा चौरे 0

सुधा की आज वापसी थी ,15 दिन मायके में कब बीत गए पता ही नहीं चला।भाभी ने हल्दी कुमकुम लगा कर विदा किया ,टैक्सी में […]

नन्ही कली

नन्हीं कली

चमन की कली अब फूलबन गुलशन को महकाएगीदो घरों की आबरू लेजीवन के पथ चलकरमंजिल तय कर जाएगीमुश्किल कितने भी आ जाएअपने पग ना डगमगाएगीशूल […]

समन्दर

समन्दर और महामारी

3 फ़रवरी, 2021 सुषमा चौरे 0

रात भर लहरों ने ,सिर पटक पटक कर,किनारे की रेत को धो दिया,समतल कर दिया किनारा,आभास ही नहीं होता,कोई गुजरा हो रात वहाँ से,दूर तलक […]

महात्मा गाँधी

महात्मा गांधी

3 फ़रवरी, 2021 पूजा करे 0

विधा: सायली खादीकी चादरआँखों पर ऐनकहाथों मेंलाठी बनाकरपहचान अपनीसत्य, अहिंसा केथे कट्टरपूजारी बंदरथे तीनबुरा मत कहोना देखो ,सुनो शरीरसे कृशकायपर थे बलवानपक्के इरादोंके देखेआँखों नेसपने […]

बाबूजी

बाबूजी

“देखों सुमि, बाबूजी का कमरा एकदम साफ सुथरा होना चाहिए, उन्हें सबकुछ व्यवस्थित अच्छा लगता हैं” राहुल लगातार बोले जा रहा था। इतने में सुमि […]