जीवन बना एक बंगला

जीवन एक बंगला

3 अगस्त, 2021 सुषमा शर्मा 2

जीवन बना एक बंगला,साँचे में ढाल, चित्त चेतनासद्कर्म लगा कर लोहा,राम-नाम, सजाया जंगला। सत की ईट, ज्ञान की रेती,घोल प्रेम सीमेंट है लगाई,हरि नाम बनाई […]

चारपाई

चारपाई

चारपाई का नाम सुनते ही हमें फिल्मी गीत याद आ जाते है… सरकाई ले खटिया जाड़ा लगे… या धीरे से जाना खटियन में ओ, खटमल […]

एल्बम

एल्बम

दिवाली की साफ़-सफाई में एल्बम के ढेर को व्यवस्थित करते-करते, नीता का मन अकस्मात् तस्वीरों को देखने के लिए मचल उठा ज्यों-ज्यों तस्वीरों पलट-पलट कर […]

साहित्यकार ओमप्रकाश जोशी

स्वर्गीय ओमप्रकाश जोशी को श्रद्धांजलि

2 अगस्त, 2021 डॉ. भावना बर्वे 1

“तुम बेवजह रुक सकते हो, पर न रुकेगा समय प्रवाहसृजनात्मकता ही बन पायेगी, तेरे कुछ होने का गवाहबीते कल को भूलें, अभी से नव-सृजन प्रवास […]

सोशल मीडिया

सोशल मीडिया

2 अगस्त, 2021 रश्मि मोयदे 0

सोशल मीडिया का हमारे सामाजिक जीवन पर कितना प्रभाव पड़ा है और इसके कितने अच्छे व बुरे परिणाम हुए है,इसके बारे में थोड़ा विचार ज़रूर […]

शेष है

आँखों की मुस्कान

2 अगस्त, 2021 मानव कौल 1

जब तक मुस्कुराती हुई आँखें शेष हैं।तब तक शेष है,गिर जानाऔर फिर उठकर खड़े होना,हर ज़ख़्म का भरते जाना,माफ़ करना और भूल जाना,अपने सबसे पास […]

अपनेपन का ढोंग

ढोंग

2 अगस्त, 2021 मंजुला दुबे 1

शीर्षक: अपनेपन का ढोंग जब प्राण पखेरु उड़ गया,तब तुमने एक दिया जलाया।जीवन भर दुःख का अंधेरा दिया,अब इस उजाले का ढोंग किया।। ‌‌जब प्राण […]

शिव गौरा

शिव गौरा

2 अगस्त, 2021 रश्मि मोयदे 0

शिव गौरा बाबा महाकाल की इस नगरी से,वरदान मिले मुझे भोले बाबा से धरा सी धैर्यवान बन जाऊऔर सरल सहज बन मुसकाऊ देख कर आकाश […]

झरने की झंकार

झरनों की झंकार

झरने की झंकार सुनअनमने पेड़ झूम जातेवीरान वादियों मेंखुश हो लहराते झरने कल कल यू बहतेपर्वतों को चीर राह चुन लेतेअपनी मौज में बहतेबरखा में […]

त्याग

त्याग

2 अगस्त, 2021 वाणी गुप्ता 2

एक लौ,दूसरी लौ को रोशन गई…..एक लौ,दूसरी लौ को रोशन गई…..वो बुझी,वो बुझी,,, और उसको रोशन कर गई।ये त्याग देख कर भी कोई समझ न […]

हिंदी दोहे

दोहा-दरबार

2 अगस्त, 2021 रश्मि स्थापक 0

हिंदी दोहे मैट्रिक्स मीटर में रचित हिंदी कविता में स्व-निहित तुकबंदी का एक रूप है। कविता की यह शैली पहले अपभ्रंश में आम हो गई […]

कुंडलियाँ

कुंडलियाँ

2 अगस्त, 2021 आरती डोंगरे 0

कुंडलियाँ छंद का प्रारंभ दोहे से होता है । दोहा एक एवं दो रोला का समावेश होता है । दोहा का अंतिम चरण रोला का […]

बारिश

बारिश

बारिश की चंद बूंदें क्या गिरी,मौसम खुशनुमा कर गईमन मचल गया भीगकरहर दिल जवां कर गई। अँगड़ाईयां लेने लगी ख्वाहिशें,सर्द मौसम की आड़ में।मन के […]

नन्ही सी कली

नन्हीं सी कली

2 अगस्त, 2021 शशि शर्मा 0

वह नन्हीं सी कलीशाख़ पर बैठी।मुझे देख धीरे सेशर्माई, मुस्काई। कांटों की गोद मेंअस्तित्व अपना बचाती।एक दिन अचानकजोर से खिलखिलाई। फूल बनकर जग मेंअपनी सुगन्ध […]

बचपन की याद

बचपन की याद

शीर्षक: बचपन की याद नीम बरगद हो या पीपल,देते शीतल ठंडी छाव सदा।गांव का शांत वातावरण ही,हमको लगता हरदम प्यारा।चिंता फिकर नहीं है हमको,मिल जुल […]

नन्ही कली

प्रकृति नारी के रूपों सी नजर आती है..

2 अगस्त, 2021 स्वाति जोशी 1

जीवन के आरंभ से ही,नन्ही कली सी मुस्कुराती है।नन्ही सी प्यारी गुड़िया बन,अल्हड़, चंचल सी बहती जाती है। प्रकृति नारी के रूपों सी नजर आती […]

डेढ़ टिकट

डेढ़ टिकट

लघुकथा शीर्षक: डेढ़ टिकट महानगर के उस अंतिम बस स्टॉप पर जैसे ही कंडक्टर ने बस रोक दरवाज़ा खोला, नीचे खड़े एक देहाती बुजुर्ग ने […]

अपने भगवान

अपने-अपने भगवान

2 अगस्त, 2021 रश्मि स्थापक 1

शीर्षक: अपने अपने भगवान अंग्रेजी भाषा के शिक्षक दुबे जी का एक बड़ा सपना था कि रिटायरमेंट के बाद दोनों बहनों के परिवार के साथ […]

कूकर सीटी

कूकर की सीटी

2 अगस्त, 2021 पूनम झा 0

शीर्षक : कूकर की सीटी “दादी ! आज आप बहुत गुस्से में हैं ?” आठ साल का चिंटू दादी का मुँह देखते-देखते कह रहा था […]

कण कण की कीमत

अन्न ब्रम्ह

2 अगस्त, 2021 विभा भटोरे 0

मुनिया हैरान है ! मॉं और नानी गेहूँ छान रही हैं, साफ करने के बाद पिसवाएंगे। उन्होंने थैला भर दिया, नानाजी बिखरे कुछ दाने बीन […]

मेरे देश

मेरा देश

2 अगस्त, 2021 माया कौल 0

मेरे देश ,,,, तुम कितनी मत भिन्नताओं में जीते हो, मेरे देश,,,, तुम कितनों के धर्मों के संबल हो, मेरे देश,,,, तुम कितने दंगाईयों को […]

शब्द में ही

शब्द

2 अगस्त, 2021 डॉ. आशा शरण 0

शब्द में ही ओंकार का वास हैहर शब्द में उस ईश्वर का वास हैमंदिर में गुंजित मंत्रों की पावन तान हैशब्द में ही बसती गुरु […]

पर्यावरण का विनाश

मौसम कुछ उदास

पर्यावरण का विनाश पतझड़ बीता सावन आया मौसमने ली अंगड़ाई फ़िज़ा में रंग बिखरे अब पपीहे कीगूंज सुनाई पंछियों की धरा पर चहचहाहट यह गूंजकानों […]

दादी की कहावत

दादी की कहावत

1 अगस्त, 2021 रश्मि मोयदे 0

शीर्षक-दादी की कहावत दादी हमेशा कहती थी। नक्टो चपटो बेटो कचहरी जाइ न बठ्यो।श्माम सुन्दर बेटी चूलो जाइ ख फूक्यो। दादी को अपने लाड़ले पोते […]