मुक्ति नही चाहती औरत

मुक्ति

मुक्ति नही चाहती औरतना ही आज़ादी चाहती है अपने बन्धनों से। बंधी रहना चाहती है वह अपने कर्त्तव्यपथ से..ममता की डोर से बंधना ही उसकी […]

लगाव

लगाव

शीर्षक: लगाव सुशीला अपने बीमार बेटे मिन्टू के साथ अस्पताल से घर आ रही थी रास्ते मे मिन्टू ने अपनी मां से उत्सुकता से पूछा- […]

जिंदगी का सफर

सफर

कितनी मन्नत और जतन के बाद भगवान ने बच्चे का मुँह दिखाया। कितनी ग़रीबी से बड़ा किया अब बेटा बैंक ऑफिसर है। बहु पोते सब […]

नारी

अस्मिता

नारी अस्मिता नारी अस्मिताआज प्रश्न बन गई।मातृ देवो भवसंस्कृति धूमिल पड़ गई।गाली दी जाती है तोऔरत के नाम पर।सदा डराई जातीइज़्ज़त के नाम पर।मजबूर की […]

जीवन

जीवन

विफल मन शापित जीवनक्या पूर्ण कर पायेगा किसी का रिक्त पन। बोझ हुआ जाता जीवनसंवरण करता गया वरण। ना थमा दौर सुमधुर स्मृति काना मुक्ति […]