झरने की झंकार

झरनों की झंकार

झरने की झंकार सुनअनमने पेड़ झूम जातेवीरान वादियों मेंखुश हो लहराते झरने कल कल यू बहतेपर्वतों को चीर राह चुन लेतेअपनी मौज में बहतेबरखा में […]

पर्यावरण का विनाश

मौसम कुछ उदास

पर्यावरण का विनाश पतझड़ बीता सावन आया मौसमने ली अंगड़ाई फ़िज़ा में रंग बिखरे अब पपीहे कीगूंज सुनाई पंछियों की धरा पर चहचहाहट यह गूंजकानों […]

जिंदगी ऐसे चल रही

जिंदगी

जिंदगी ऐसे चल रही जैसे शमाजल रहीऔरों को रोशनी दे खुद पिघलरहीजिंदगी के उतार-चढ़ाव से बुझते बुझतेजल रहीकहीं रोशनी कहीं अंधेरा मंजिल की राहों सेगुजर […]

मुरली की धुन : सायली छंद

सुनकर मुरलीकी धुन कान्हाको ढूंढेवृंदावन ले गुलाल सखासंग खेले होलीकान्हा राधासंग भर पिचकारी सखी दौड़ी आई बरसानियासे गोपीयोसंग माखन मिश्री खाए कान्हा झूमे नाचेसखा गोपियोंसंग

नर्मदा

नर्मदे हर

जय माँ नर्मदा अमरकंटक से निकली सहस्त्रनामसे जानी जातीनिर्मल जल ले कल कल बहती हर दिशा में…नजर आतीपापियों के पाप धोए दर्शन दे संतोंका मान […]

बाल

बाल मजदूरी

मन चंचल मन बावरा मनसमझ ना पाएखेलने की उम्र में बालक बोझ ढोतानजर आएयह कैसी मजबूरी बचपन हाथों सेनिकला जाएकर में किताब की जगह बोझ […]

वर्ण पिरामिड – शमा, पतंग

विषय: शमा येशमाजलकेदिखाएगीगम के तममे डूबे इंसानको राह बताएगी विषय: पतंग मॉसखासंग मेपतंग लेखूले आसमातले यू उडाउनव वर्ष मनाऊं Photo by Abhishek Upadhyay on Unsplash

दुल्हन

दुल्हन – ओढ़ के लाल चुनरिया

ओढ़ के लाल चुनरियाचली दुल्हन ससुरालमाथे पर बिंदिया चमकेहाथ चूड़ियां खनके लालओढ़ के लाल चुनरिया मेहंदी का रंग लिए हाथ मेंकजरारी आंखें मे संजोए सपनेछोड़ […]

बिटिया चली ससुराल

करके श्रृंगार बिटिया चली ससुराल

करके सोलह श्रृंगार मेरीबिटिया चली है ससुरालवह नन्हीं सी कली अबफूल बन गई मेरी बगियाछोड़ अपने चमन को चली जहां भी जाएगी अपनीमहक से सबका […]

नन्ही कली

नन्हीं कली

चमन की कली अब फूलबन गुलशन को महकाएगीदो घरों की आबरू लेजीवन के पथ चलकरमंजिल तय कर जाएगीमुश्किल कितने भी आ जाएअपने पग ना डगमगाएगीशूल […]

गणतंत्र दिवस

आज देश की मिट्टी का तिलककिया जाएहर घर तिरंगा लिए गणतंत्र दिवसमनाया जाएकितने वीरों के बलिदानों के बाद यहघड़ी आई हैसंविधान अपना बने कुर्बानियां देकरजन्नत […]

वक्त

वक्त का पहिया सदियों से घूमता जा रहाठहरता ही नहीं चक्र चलता जा रहा थम गया तो प्रलय आ जाएगा इंसान काजहां से नामो निशान […]

विधाता की लीला अपरंपार

विधाता

25 दिसम्बर, 2020 सरिता अजय साकल्ले 0

विधाता की लीला अपरंपार है कहीं खुशियांतो कई गम हजार हैं कहीं सूर्य की रोशनी तो कई घोरअंधकार है कहीं जन सैलाब का मेला तो […]