मुझे मेरा गाँव याद आता है

मुझे मेरा वो गाँव याद आता है

बरगद की छाँव मेंबैठ के भुट्टे खाना,संग दोस्तों के वहाँ घंटों भर बतियाना,नहीं भुलाये भूलतावो गुजरा जमाना , माँ के डर से छुपके जाना, ठंड में […]

क्यों मनाते हैं हिंदी दिवस

हिन्दी का मान

15 सितम्बर, 2021 सुभाष शर्मा 0

ये बात है मेरे देश के सम्मान की।ये बात है मेरे मान अभिमान की।हिन्दुस्तान की धरती है मेरी माता,बात करूंगा मैं हिन्दी के मान की। […]

क्यों मनाते हैं हिंदी दिवस

हिंदी और तोर मोर

15 सितम्बर, 2021 माया कौल 0

तोर मोर कछु जान न पाएमाझा तुझा भी ना पहचाने हम सबको अपनाते रहतेबहु भाषी पर हिन्द के है हम काये लला कित जाय रहे […]

जीवन बना एक बंगला

जीवन एक बंगला

3 अगस्त, 2021 सुषमा शर्मा 2

जीवन बना एक बंगला,साँचे में ढाल, चित्त चेतनासद्कर्म लगा कर लोहा,राम-नाम, सजाया जंगला। सत की ईट, ज्ञान की रेती,घोल प्रेम सीमेंट है लगाई,हरि नाम बनाई […]

शेष है

आँखों की मुस्कान

2 अगस्त, 2021 मानव कौल 1

जब तक मुस्कुराती हुई आँखें शेष हैं।तब तक शेष है,गिर जानाऔर फिर उठकर खड़े होना,हर ज़ख़्म का भरते जाना,माफ़ करना और भूल जाना,अपने सबसे पास […]

अपनेपन का ढोंग

ढोंग

2 अगस्त, 2021 मंजुला दुबे 1

शीर्षक: अपनेपन का ढोंग जब प्राण पखेरु उड़ गया,तब तुमने एक दिया जलाया।जीवन भर दुःख का अंधेरा दिया,अब इस उजाले का ढोंग किया।। ‌‌जब प्राण […]

झरने की झंकार

झरनों की झंकार

झरने की झंकार सुनअनमने पेड़ झूम जातेवीरान वादियों मेंखुश हो लहराते झरने कल कल यू बहतेपर्वतों को चीर राह चुन लेतेअपनी मौज में बहतेबरखा में […]

शिव गौरा

शिव गौरा

2 अगस्त, 2021 रश्मि मोयदे 0

शिव गौरा बाबा महाकाल की इस नगरी से,वरदान मिले मुझे भोले बाबा से धरा सी धैर्यवान बन जाऊऔर सरल सहज बन मुसकाऊ देख कर आकाश […]

हिंदी दोहे

दोहा-दरबार

2 अगस्त, 2021 रश्मि स्थापक 0

हिंदी दोहे मैट्रिक्स मीटर में रचित हिंदी कविता में स्व-निहित तुकबंदी का एक रूप है। कविता की यह शैली पहले अपभ्रंश में आम हो गई […]

त्याग

त्याग

2 अगस्त, 2021 वाणी गुप्ता 2

एक लौ,दूसरी लौ को रोशन गई…..एक लौ,दूसरी लौ को रोशन गई…..वो बुझी,वो बुझी,,, और उसको रोशन कर गई।ये त्याग देख कर भी कोई समझ न […]

कुंडलियाँ

कुंडलियाँ

2 अगस्त, 2021 आरती डोंगरे 0

कुंडलियाँ छंद का प्रारंभ दोहे से होता है । दोहा एक एवं दो रोला का समावेश होता है । दोहा का अंतिम चरण रोला का […]

बचपन की याद

बचपन की याद

शीर्षक: बचपन की याद नीम बरगद हो या पीपल,देते शीतल ठंडी छाव सदा।गांव का शांत वातावरण ही,हमको लगता हरदम प्यारा।चिंता फिकर नहीं है हमको,मिल जुल […]

नन्ही सी कली

नन्हीं सी कली

2 अगस्त, 2021 शशि शर्मा 0

वह नन्हीं सी कलीशाख़ पर बैठी।मुझे देख धीरे सेशर्माई, मुस्काई। कांटों की गोद मेंअस्तित्व अपना बचाती।एक दिन अचानकजोर से खिलखिलाई। फूल बनकर जग मेंअपनी सुगन्ध […]

बारिश

बारिश

बारिश की चंद बूंदें क्या गिरी,मौसम खुशनुमा कर गईमन मचल गया भीगकरहर दिल जवां कर गई। अँगड़ाईयां लेने लगी ख्वाहिशें,सर्द मौसम की आड़ में।मन के […]

नन्ही कली

प्रकृति नारी के रूपों सी नजर आती है..

2 अगस्त, 2021 स्वाति जोशी 1

जीवन के आरंभ से ही,नन्ही कली सी मुस्कुराती है।नन्ही सी प्यारी गुड़िया बन,अल्हड़, चंचल सी बहती जाती है। प्रकृति नारी के रूपों सी नजर आती […]

मेरे देश

मेरा देश

2 अगस्त, 2021 माया कौल 0

मेरे देश ,,,, तुम कितनी मत भिन्नताओं में जीते हो, मेरे देश,,,, तुम कितनों के धर्मों के संबल हो, मेरे देश,,,, तुम कितने दंगाईयों को […]

शब्द में ही

शब्द

2 अगस्त, 2021 डॉ. आशा शरण 0

शब्द में ही ओंकार का वास हैहर शब्द में उस ईश्वर का वास हैमंदिर में गुंजित मंत्रों की पावन तान हैशब्द में ही बसती गुरु […]

पर्यावरण का विनाश

मौसम कुछ उदास

पर्यावरण का विनाश पतझड़ बीता सावन आया मौसमने ली अंगड़ाई फ़िज़ा में रंग बिखरे अब पपीहे कीगूंज सुनाई पंछियों की धरा पर चहचहाहट यह गूंजकानों […]

प्रथम वंदन गुरू का

प्रथम वंदन गुरू का

24 जुलाई, 2021 सुभाष शर्मा 0

प्रथम-वंदन-गुरू-का: गुरू पूर्णिमा के अवसर पर जीवन में मिले समस्त गुरुओं को मेरा शत् शत् नमन। प्रथम वंदन करता हूँ गुरू का।जिसने जीवन दर्शन करवाया।आशीष […]

प्रीत हाइकु

प्रीत – हाइकु

15 जुलाई, 2021 विभा भटोरे 0

विषय -प्रीत हाइकु हाइकु जापानी पद्धति है यह 3 लाइन की कविता होती है। इसका मुख्य गुण ” गागर में सागर भरना ” होता है […]

दया करो सुन लो याचना

सब अच्छा हो

7 जुलाई, 2021 ममता कानुनगो 0

प्रभु से है प्रार्थना सब अच्छा हो,हृदय से है भावना सब अच्छा हो। श्वास प्रश्वास ना रुके कभी,हनुमत हरे दुःख दर्द सभी,नित करूँ आराधना सब […]

मैं झरना हूँ

झरना

3 जुलाई, 2021 अनिता शुक्ला 0

नित बहना मेरा कामरोके से ना रूकना हैबहते ही हमेशा रहना हैमैं झरना हूँ राहें हों उँची नीचीया राहें हों टेढ़ीमुझको तो उन्हेंपार करके जाना […]

तू मुझे आगे ले चल

माँ

28 जून, 2021 नूतन भट्ट 0

मां तू ही मेरा आज है,तू ही मेरा कल,हाथ थाम कर मेरा,तू मुझे आगे ले चल । तेरी परवाह होती है,मुझे आजकल,हाथ थाम कर मेरा,तू […]

वटवृक्ष

वटवृक्ष

28 जून, 2021 माया कौल 0

शीर्षक: वटवृक्ष मुझे इस अधूरे पन में भी,कितनी पूर्णता का ,एहसास मिलता है,,,, क्या बताऊँ??????जिंदगी बहुत छोटी है ,पर न जाने क्यों ,, वो अपने […]

कान्हा की निंदिया

कान्हा की निंदिया

कविता शीर्षक: कान्हा की निंदिया कान्हा करे अठखेलियाँ,यशोदा माँ होती है तंग।पास बुलाती, डांट लगाती,कान्हा को दुलारती पुचकारती।कान्हा को फिर पास सुलाती।। माँ यशोदा के […]

बचपन

सुनहरा बचपन

शीर्षक: सुनहरा बचपन आज खोली जीवन की किताबहर पन्ने पर कुछ इस तरह था,जीवन के खट्टे-मीठे पलों का हिसाब,कभी कड़ी धूप मिली जीवन में,तो कभी […]

क्या हो तुम

क्या हो तुम

27 जून, 2021 नीरज बवेँ 0

क्या हो तुम …..रूप तेरा ध्रुवतारा , यौवन है जैसे चाँदनी ,प्रेम की आशा लगे , कौन है मनमोहिनी ……….चाल नवयौवना सी है , व्यवहार […]

रिश्ते जो निभ नही पाए

रिश्ते

25 जून, 2021 माया कौल 0

बड़ी खूबसूरत कहानियां गढ़ पाए,वो रिश्ते जो निभ नही पाए,,,,, वो रिश्ते जो अनछुए से रह गए,वो ही राधा को दर्शन दे गए,,, वो सुदामा […]

तू है प्रकृति का अंग

प्रकृति

मानव मत भूल तू है प्रकृति का अंग,सीख ले प्रकृति संग जीवन के ढंग।सीख परोपकार के ढंग धरा से सीख सहनशीलता,आकाश से ले सीख हृदय […]

जय नर्मदा माई

जय माँ नर्मदे

24 जून, 2021 रश्मि मोयदे 0

जय माँ नर्मदेजय माँ नर्मदे, विंध्यवासिनीजय माँ रेवा हृदयवासिनी! तुम हो जीवन मोक्ष दायिनी,आत्म तारिणी पाप नाशिनी, माँ नर्मदा की है महिमा न्यारी,माँ तो है […]

मुक्ति नही चाहती औरत

मुक्ति

मुक्ति नही चाहती औरतना ही आज़ादी चाहती है अपने बन्धनों से। बंधी रहना चाहती है वह अपने कर्त्तव्यपथ से..ममता की डोर से बंधना ही उसकी […]

अन्नदाता का सम्मान होना चाहिए

अन्नदाता का सम्मान

6 जून, 2021 डॉ. आशा शरण 0

अन्नदाता का सम्मान होना चाहिए  धरती को सर्वस्व मानकरअपना सर्वस्व न्यौछावर करतारात-दिन ही सेवक बनकरधरणी का हर क्षण मान बढ़ाताअत: अन्नदाता का सम्मान …… वसुधा […]

यादों की साझेदारी

यादों की साझेदारी

6 जून, 2021 नीरज बवेँ 0

शीर्षक: यादों की साझेदारी आओ मिलजुल कर कुछ यादें ताजा करेंबचपन के ख्वाबों को एक-दूसरे से साझा करें ,करें याद वो कागज़ की नाव, साईकिल […]

अमलतास

अमलतास

विषय: अमलतासविधा: तांका ५,७,५,७,७ मनमोहक,पहने पीताम्बर,अमलतास,हर पल मुस्काए,चले सज संवर । वृक्ष श्रृंगार,पहने पीत झूमर,पुष्प बिछाए,सहत सूर्य ताप,झूमे ये अंग अंग। मौन तपस्वी,वसुन्धरा वैरागी,छनती धूप,मधुरिम […]

काश ऐसी होली

होली – काश ऐसा हो जाए

मुखौटे हटे असली रंग सामने आयेंदूसरों को नहीं हम खुदको पहचानेहृदय में श्याम समा जायेंसारा संसार बृज नजर आयेंकाश, ऐसी होली अबके बरस आयें। अहंकार […]

पुस्तकें मन बहलाती

पुस्तकें

शीर्षक : पुस्तकें मन बहलाती पुस्तकों से है, हमारा सबका नातापढ़कर पुस्तकें, व्यक्ति ज्ञान पाता।पुस्तकों को हम सब रखें , सम्भाल,पुस्तकें है, हमारी भाग्य -विधाता!! […]

पलाश की होली

पलाश की होली

शीर्षक : पलाश की होली अलसाये से घने जंगलों मेंपलाश की कली मुस्काई सी, सूखी सूखी पतझड़ की साखों परबसन्त की कोपल देख धरा फिर […]

नववर्ष ये प्रकृति का

नववर्ष

नववर्ष ये प्रकृति का है, और सृष्टि इसे मनायेगी। पल्लवित होंगे पुष्प-पत्र नव,नव अंकुर नज़र आयेंगे।। गीत ये सृष्टि कर्ता के कौशल का है,सर्व जगत […]

जीते जाना

क्षणों को जीते जाना

21 मई, 2021 माया कौल 0

शीर्षक : क्षणों को जीते जाना उम्र को सहते जाना,क्षणों को जीते जाना,लो माला गूंथ ली,,,और वक्त सरक गया, दीनता और हीनता,,गुनगुनाते मच्छरों की भांतिहर […]

हनुमान

वीर हनुमान

महाबली हनुमान,तात तोरे पवमान।अंजना के लाल प्रभुजग में पुजाएँ हैं। रविकर मुख धारेअसुर लाखों संहारेभगत वत्सल प्रभुराम को नमाएँ हैं। सिंधु सात लांघ करसीताजी की […]

जिंदगी ऐसे चल रही

जिंदगी

जिंदगी ऐसे चल रही जैसे शमाजल रहीऔरों को रोशनी दे खुद पिघलरहीजिंदगी के उतार-चढ़ाव से बुझते बुझतेजल रहीकहीं रोशनी कहीं अंधेरा मंजिल की राहों सेगुजर […]

जय नर्मदा माई

माई नर्मदा

शीर्षक : जय नर्मदा माई हो सदा तिहारी जय जय जयकारमैकल सुता तुम कलकल बहती धारमाई नर्मदा शिवसुता तुम देव ऋषिमुनि गणसब घाटों पर तिहारे […]

स्वाभिमान

ना बेचो अपने स्वाभिमान को

शीर्षक : स्वाभिमान ना बेचो अपने स्वाभिमान कोभरो उड़ान अपने आसमान कोइसकी उसकी बातों परमत कान दोतुम डटें रहोअपने इम्तिहान को फूल कांटे आएंगे हजारबढ़ते […]

प्रार्थना

प्रार्थना

हो भोर तुम्हीं और साँझ तुम्हींनभ भी तुम ,पाताल तुम्हीं,है धरा तुम्हारी, व्याप्त रहोतुम मार्ग मेरा प्रशस्त करो !!शीत हरो, सब ताप हरो ,मन के […]

नारी

अस्मिता

नारी अस्मिता नारी अस्मिताआज प्रश्न बन गई।मातृ देवो भवसंस्कृति धूमिल पड़ गई।गाली दी जाती है तोऔरत के नाम पर।सदा डराई जातीइज़्ज़त के नाम पर।मजबूर की […]

जीवन

जीवन

विफल मन शापित जीवनक्या पूर्ण कर पायेगा किसी का रिक्त पन। बोझ हुआ जाता जीवनसंवरण करता गया वरण। ना थमा दौर सुमधुर स्मृति काना मुक्ति […]

नारी ही नारायणी

नारी ही नारायणी

नारी ही नारायणीजन्म देने वाली जननीकहीं भी तेरा न होअपमानचाहे न मिले सम्मान रोज भले ही पूजाकरें न कोईपर न हो तुझ परअत्याचारमिले न समान […]

श्रृंगार

मनहरण घनाक्षरी – श्रृंगार

विषय: श्रृंगारविधा: मनहरण घनाक्षरी कनक सी कांति युक्त,रूप यौवनी संयुक्त,पोर पोर प्रेम सूक्त,कामिनी रिझाती है। अलक है मेघ माल,अधर रंगे हो लाल,भाल ज्यों कुमुद ताल,देह […]

सुंदर

कविता

कोमल भावनाओं की सुंदरअभिव्यक्ति है ……. कविताकवि के ह्रदय की सुंदरपरिकल्पना है …… कविताभावों को शब्दों के धागे मेंपिरोयी माला है …… कवितानव रसों से […]

तूफान

तूफान का अंदेशा

14 मई, 2021 नीरज बवेँ 0

शीर्षक: तूफान का अंदेशा हवाओं में कुछ हलचल है, थोड़े समझदार हो जाइए!!तूफान आने का अंदेशा है, थोड़े खबरदार हो जाइए!! बुझ ना जाए बेवक्त […]

व्यक्तित्व

व्यक्तित्व

व्यक्तित्व की वाणी निर्मित हो ऐसी,छू ले अंतर्मन, छाप छोड़े जीवन भर।बन जाओ चंदन के जैसे,जिस पर लिपटे रहते भुजंग।विष से भरा विषधर,ललायित पाने को […]

नारी का वजूद

वजूद

एक जिंदगी में, कई किरदार निभा जाती हैं,मगर दुनिया की भीड़ में क्यों बेबस नज़र आती हैं बेटी से माँ तक का सफ़र बखूबी निभाती […]

मैं हिन्दी हूँ

मैं हिन्दी हूँ

12 मार्च, 2021 डॉ. आशा शरण 2

संस्कृति की संवाहक बन रहती मैं हिन्दी हूँ,भारत माँ के ललाट में शोभित बिंदी हूँ। हर भाषा मुझसे शोभित है,पर मेरा मन क्यों आहत है। […]

कब तक रुलाती रहेगी सड़क

कब मिलेगा इंसाफकब तक रुलाती रहेंगी सड़कसड़क सुरक्षा के लिए,बनाई गई एक तस्वीर।जो देखी नहीं गई,कहीं ओर ,जहाँ नजर डालो।बस एक खौफ, कुचलती गाड़ियां, रौंदते […]

फितरत

इक मुलाक़ात में यों ऐतबार ना कीजिए,रब्त यों न बनते चंद पलों में ,ज़रा ठहरिये चाहत रखिये साथ की, थोड़ा सोचियेइमदाद की मोहताज़ नहीं ज़िंदगी […]

जीवन ( हाइकु )

12 मार्च, 2021 सुभाष शर्मा 2

‘हाइकु’ लेखन की एक जापानी विधा है। जो तीन पंक्तियों की होती है, इसमें पहली पंक्ति में पाँच अक्षर ,दूसरी पंक्ति में सात अक्षर एवं […]

महाकाल

12 मार्च, 2021 वाणी गुप्ता 0

ॐ, शिव, शम्भू, महाकाल…. ज्योर्तिलिंग में जो करते वाश,गौरा भी है… उनके साथ। शक्ति है जिनका आधार,हर पल करते दुष्टों का संगहार। हिमालय है… उनका […]

रंग दो नन्द लाल

12 मार्च, 2021 वाणी गुप्ता 0

मुझे कुछ ऐसे रंग दो नंद के लाल,तुम्हरे गले में जैसे बैजन्ती की माल। तुझ संग जोडू ऐसे अपना नाम,जैसे हो तुम राधा के श्याम। […]

जल की रासायनिक क्रिया

एक बार हाईड्रोजन, बोली ऑक्सीजन से,मैं तो स्वयं जलती हूँ, तू सबको क्यों जलाता है।तुझको क्या मिल जाता है |ऑक्सीजन बोला, हाईड्रोजन से,तू मुझसे, दूर […]

वसंत उत्सव

शब्दों की पंखुड़ी, चंदन महका घर आंगनबौराये आम, टेसू फूले,मचली धरती, लहराई फसल,महक रही पुरवाई, बरखा बहार आई……अठखेली करे धूम मचाये,अधखिली धूप, लुक छिप जाये,अमृत […]

बैंक का फोन

10 मार्च, 2021 सुधा केशरे 0

एक दिन हमारी श्रीमतीजी का चेहरा था तमतमाया,कहने लगी सुनिये जी, क्या जो अब तक है आटा खाया?क्या वह इन बैंक वालों से हमने पाया।मैंने […]

प्यारे बचपन

10 मार्च, 2021 सुधा केशरे 0

कल रात फिर से वो मेरे सपने में आया ,आया तो कई बार ,पर कल उसने मुझे बहुत तड़पाया। जानती हूँ, तुम्हें पाना मेरे लिये […]

मन की बगिया

10 मार्च, 2021 अनिता शुक्ला 0

मन की बगिया मेंफूल खिले मुरझा गएआँसुओं से सींचावो बह ही गएबिखरना था जब यूँतो खिले क्यों थेखिलकर यूँ बिखर गएखिले मन को तोड़ गएहुनर […]

श्रृंगार

10 मार्च, 2021 सुषमा शर्मा 0

विषय -श्रृंगार मन हरण घनाक्षरी कर चली है श्रृंगार,एक अलबेली नार,नैन में अंजन सार,ये तो मतवाली है। माथे बिंदिंया है लाल,सुर्ख हैं गुलाबी गाल,दंत -पंक्ति […]

बड़ी फजर

मंदिर म जाओढाैल बजाओ नगाड़ा बजाओ**चाहे तो शंख ऩ$ घडीयालबजाओआना चार आना काेपरसाद चड़ावाेराम राम कराेन$ खाैबज मुरादन$ मांगाेभगवान हमाराे फलाणाे कामहुई जाय?हमाराे अमकाे काम […]

विडंबना

8 मार्च, 2021 जागृति डोंगरे 0

अक्सर डूबती हैमझधार में कश्तियाँहमने तो किनारों परडूबते देखा है। आँधियों में भीटिमटिमाते हैं कुछ दियेकुछ को हवा के हल्केझोंके से बुझते देखा है। खंजरों […]

मुरली की धुन : सायली छंद

सुनकर मुरलीकी धुन कान्हाको ढूंढेवृंदावन ले गुलाल सखासंग खेले होलीकान्हा राधासंग भर पिचकारी सखी दौड़ी आई बरसानियासे गोपीयोसंग माखन मिश्री खाए कान्हा झूमे नाचेसखा गोपियोंसंग

किताब

8 मार्च, 2021 पूजा करे 0

हर पन्ने में छुपा कर रखती है राज ,सिलसिलेवार पढ़ने पर खुलते नजर आते हैं। उसकी वो सौंधी सौंधी महक ,हृदय को प्रफुल्लित कर जाती […]

सवाल

8 मार्च, 2021 अनिता शुक्ला 0

अन्तर्द्वन्द में उठे सवाल हैंहिलौरे ऐसे ले रहे हैंसवालों से घिरा मन हैजबाव कहीं मिलते नहींसवाल जो अनछुए सेगहरी कश्ती में डूबे सेजबाव ऐसे मिलेजो […]

आयो फागुन आयो

आयो फागुन आयो,माघ पूनम ,डांडो होली को,गाढ़ो रे गाढ़ो…. वासंती पुरवइया केसंग,फागुन की गर्माहट,शीतल जल को पीबणू,भायो रे भायो… पूनम की होली का फेरा,हार -कंकण […]