अन्नदाता का सम्मान होना चाहिए

अन्नदाता का सम्मान

6 जून, 2021 डॉ. आशा शरण 0

अन्नदाता का सम्मान होना चाहिए  धरती को सर्वस्व मानकरअपना सर्वस्व न्यौछावर करतारात-दिन ही सेवक बनकरधरणी का हर क्षण मान बढ़ाताअत: अन्नदाता का सम्मान …… वसुधा […]

यादों की साझेदारी

यादों की साझेदारी

6 जून, 2021 नीरज बवेँ 0

शीर्षक: यादों की साझेदारी आओ मिलजुल कर कुछ यादें ताजा करेंबचपन के ख्वाबों को एक-दूसरे से साझा करें ,करें याद वो कागज़ की नाव, साईकिल […]

अमलतास

अमलतास

विषय: अमलतासविधा: तांका ५,७,५,७,७ मनमोहक,पहने पीताम्बर,अमलतास,हर पल मुस्काए,चले सज संवर । वृक्ष श्रृंगार,पहने पीत झूमर,पुष्प बिछाए,सहत सूर्य ताप,झूमे ये अंग अंग। मौन तपस्वी,वसुन्धरा वैरागी,छनती धूप,मधुरिम […]

काश ऐसी होली

होली – काश ऐसा हो जाए

मुखौटे हटे असली रंग सामने आयेंदूसरों को नहीं हम खुदको पहचानेहृदय में श्याम समा जायेंसारा संसार बृज नजर आयेंकाश, ऐसी होली अबके बरस आयें। अहंकार […]

पुस्तकें मन बहलाती

पुस्तकें

शीर्षक : पुस्तकें मन बहलाती पुस्तकों से है, हमारा सबका नातापढ़कर पुस्तकें, व्यक्ति ज्ञान पाता।पुस्तकों को हम सब रखें , सम्भाल,पुस्तकें है, हमारी भाग्य -विधाता!! […]

पलाश की होली

पलाश की होली

शीर्षक : पलाश की होली अलसाये से घने जंगलों मेंपलाश की कली मुस्काई सी, सूखी सूखी पतझड़ की साखों परबसन्त की कोपल देख धरा फिर […]

नववर्ष ये प्रकृति का

नववर्ष

नववर्ष ये प्रकृति का है, और सृष्टि इसे मनायेगी। पल्लवित होंगे पुष्प-पत्र नव,नव अंकुर नज़र आयेंगे।। गीत ये सृष्टि कर्ता के कौशल का है,सर्व जगत […]

जीते जाना

क्षणों को जीते जाना

21 मई, 2021 माया कौल 0

शीर्षक : क्षणों को जीते जाना उम्र को सहते जाना,क्षणों को जीते जाना,लो माला गूंथ ली,,,और वक्त सरक गया, दीनता और हीनता,,गुनगुनाते मच्छरों की भांतिहर […]

हनुमान

वीर हनुमान

महाबली हनुमान,तात तोरे पवमान।अंजना के लाल प्रभुजग में पुजाएँ हैं। रविकर मुख धारेअसुर लाखों संहारेभगत वत्सल प्रभुराम को नमाएँ हैं। सिंधु सात लांघ करसीताजी की […]

जिंदगी ऐसे चल रही

जिंदगी

जिंदगी ऐसे चल रही जैसे शमाजल रहीऔरों को रोशनी दे खुद पिघलरहीजिंदगी के उतार-चढ़ाव से बुझते बुझतेजल रहीकहीं रोशनी कहीं अंधेरा मंजिल की राहों सेगुजर […]

जय नर्मदा माई

माई नर्मदा

शीर्षक : जय नर्मदा माई हो सदा तिहारी जय जय जयकारमैकल सुता तुम कलकल बहती धारमाई नर्मदा शिवसुता तुम देव ऋषिमुनि गणसब घाटों पर तिहारे […]

स्वाभिमान

ना बेचो अपने स्वाभिमान को

शीर्षक : स्वाभिमान ना बेचो अपने स्वाभिमान कोभरो उड़ान अपने आसमान कोइसकी उसकी बातों परमत कान दोतुम डटें रहोअपने इम्तिहान को फूल कांटे आएंगे हजारबढ़ते […]

प्रार्थना

प्रार्थना

हो भोर तुम्हीं और साँझ तुम्हींनभ भी तुम ,पाताल तुम्हीं,है धरा तुम्हारी, व्याप्त रहोतुम मार्ग मेरा प्रशस्त करो !!शीत हरो, सब ताप हरो ,मन के […]

नारी

अस्मिता

नारी अस्मिता नारी अस्मिताआज प्रश्न बन गई।मातृ देवो भवसंस्कृति धूमिल पड़ गई।गाली दी जाती है तोऔरत के नाम पर।सदा डराई जातीइज़्ज़त के नाम पर।मजबूर की […]

जीवन

जीवन

विफल मन शापित जीवनक्या पूर्ण कर पायेगा किसी का रिक्त पन। बोझ हुआ जाता जीवनसंवरण करता गया वरण। ना थमा दौर सुमधुर स्मृति काना मुक्ति […]

नारी ही नारायणी

नारी ही नारायणी

नारी ही नारायणीजन्म देने वाली जननीकहीं भी तेरा न होअपमानचाहे न मिले सम्मान रोज भले ही पूजाकरें न कोईपर न हो तुझ परअत्याचारमिले न समान […]

श्रृंगार

मनहरण घनाक्षरी – श्रृंगार

विषय: श्रृंगारविधा: मनहरण घनाक्षरी कनक सी कांति युक्त,रूप यौवनी संयुक्त,पोर पोर प्रेम सूक्त,कामिनी रिझाती है। अलक है मेघ माल,अधर रंगे हो लाल,भाल ज्यों कुमुद ताल,देह […]

सुंदर

कविता

कोमल भावनाओं की सुंदरअभिव्यक्ति है ……. कविताकवि के ह्रदय की सुंदरपरिकल्पना है …… कविताभावों को शब्दों के धागे मेंपिरोयी माला है …… कवितानव रसों से […]

तूफान

तूफान का अंदेशा

14 मई, 2021 नीरज बवेँ 0

शीर्षक: तूफान का अंदेशा हवाओं में कुछ हलचल है, थोड़े समझदार हो जाइए!!तूफान आने का अंदेशा है, थोड़े खबरदार हो जाइए!! बुझ ना जाए बेवक्त […]

व्यक्तित्व

व्यक्तित्व

व्यक्तित्व की वाणी निर्मित हो ऐसी,छू ले अंतर्मन, छाप छोड़े जीवन भर।बन जाओ चंदन के जैसे,जिस पर लिपटे रहते भुजंग।विष से भरा विषधर,ललायित पाने को […]

नारी का वजूद

वजूद

एक जिंदगी में, कई किरदार निभा जाती हैं,मगर दुनिया की भीड़ में क्यों बेबस नज़र आती हैं बेटी से माँ तक का सफ़र बखूबी निभाती […]

मैं हिन्दी हूँ

मैं हिन्दी हूँ

12 मार्च, 2021 डॉ. आशा शरण 2

संस्कृति की संवाहक बन रहती मैं हिन्दी हूँ,भारत माँ के ललाट में शोभित बिंदी हूँ। हर भाषा मुझसे शोभित है,पर मेरा मन क्यों आहत है। […]

कब तक रुलाती रहेगी सड़क

कब मिलेगा इंसाफकब तक रुलाती रहेंगी सड़कसड़क सुरक्षा के लिए,बनाई गई एक तस्वीर।जो देखी नहीं गई,कहीं ओर ,जहाँ नजर डालो।बस एक खौफ, कुचलती गाड़ियां, रौंदते […]

फितरत

इक मुलाक़ात में यों ऐतबार ना कीजिए,रब्त यों न बनते चंद पलों में ,ज़रा ठहरिये चाहत रखिये साथ की, थोड़ा सोचियेइमदाद की मोहताज़ नहीं ज़िंदगी […]

जीवन ( हाइकु )

12 मार्च, 2021 सुभाष शर्मा 2

‘हाइकु’ लेखन की एक जापानी विधा है। जो तीन पंक्तियों की होती है, इसमें पहली पंक्ति में पाँच अक्षर ,दूसरी पंक्ति में सात अक्षर एवं […]

महाकाल

12 मार्च, 2021 वाणी गुप्ता 0

ॐ, शिव, शम्भू, महाकाल…. ज्योर्तिलिंग में जो करते वाश,गौरा भी है… उनके साथ। शक्ति है जिनका आधार,हर पल करते दुष्टों का संगहार। हिमालय है… उनका […]

रंग दो नन्द लाल

12 मार्च, 2021 वाणी गुप्ता 0

मुझे कुछ ऐसे रंग दो नंद के लाल,तुम्हरे गले में जैसे बैजन्ती की माल। तुझ संग जोडू ऐसे अपना नाम,जैसे हो तुम राधा के श्याम। […]

जल की रासायनिक क्रिया

एक बार हाईड्रोजन, बोली ऑक्सीजन से,मैं तो स्वयं जलती हूँ, तू सबको क्यों जलाता है।तुझको क्या मिल जाता है |ऑक्सीजन बोला, हाईड्रोजन से,तू मुझसे, दूर […]

वसंत उत्सव

शब्दों की पंखुड़ी, चंदन महका घर आंगनबौराये आम, टेसू फूले,मचली धरती, लहराई फसल,महक रही पुरवाई, बरखा बहार आई……अठखेली करे धूम मचाये,अधखिली धूप, लुक छिप जाये,अमृत […]

बैंक का फोन

10 मार्च, 2021 सुधा केशरे 0

एक दिन हमारी श्रीमतीजी का चेहरा था तमतमाया,कहने लगी सुनिये जी, क्या जो अब तक है आटा खाया?क्या वह इन बैंक वालों से हमने पाया।मैंने […]

प्यारे बचपन

10 मार्च, 2021 सुधा केशरे 0

कल रात फिर से वो मेरे सपने में आया ,आया तो कई बार ,पर कल उसने मुझे बहुत तड़पाया। जानती हूँ, तुम्हें पाना मेरे लिये […]

मन की बगिया

10 मार्च, 2021 अनिता शुक्ला 0

मन की बगिया मेंफूल खिले मुरझा गएआँसुओं से सींचावो बह ही गएबिखरना था जब युंतो खिले क्यों थेखिलकर युं बिखर गएखिले मन को तोड़ गएहुनर […]

श्रृंगार

10 मार्च, 2021 सुषमा शर्मा 0

विषय -श्रृंगार मन हरण घनाक्षरी कर चली है श्रृंगार,एक अलबेली नार,नैन में अंजन सार,ये तो मतवाली है। माथे बिंदिंया है लाल,सुर्ख हैं गुलाबी गाल,दंत -पंक्ति […]

बड़ी फजर

मंदिर म जाओढाैल बजाओ नगाड़ा बजाओ**चाहे तो शंख ऩ$ घडीयालबजाओआना चार आना काेपरसाद चड़ावाेराम राम कराेन$ खाैबज मुरादन$ मांगाेभगवान हमाराे फलाणाे कामहुई जाय?हमाराे अमकाे काम […]

विडंबना

8 मार्च, 2021 जागृति डोंगरे 0

अक्सर डूबती हैमझधार में कश्तियाँहमने तो किनारों परडूबते देखा है। आँधियों में भीटिमटिमाते हैं कुछ दियेकुछ को हवा के हल्केझोंके से बुझते देखा है। खंजरों […]

मुरली की धुन : सायली छंद

सुनकर मुरलीकी धुन कान्हाको ढूंढेवृंदावन ले गुलाल सखासंग खेले होलीकान्हा राधासंग भर पिचकारी सखी दौड़ी आई बरसानियासे गोपीयोसंग माखन मिश्री खाए कान्हा झूमे नाचेसखा गोपियोंसंग

किताब

8 मार्च, 2021 पूजा करे 0

हर पन्ने में छुपा कर रखती है राज ,सिलसिलेवार पढ़ने पर खुलते नजर आते हैं। उसकी वो सौंधी सौंधी महक ,हृदय को प्रफुल्लित कर जाती […]

सवाल

8 मार्च, 2021 अनिता शुक्ला 0

अन्तर्द्वन्द में उठे सवाल हैंहिलौरे ऐसे ले रहे हैंसवालों से घिरा मन हैजबाव कहीं मिलते नहींसवाल जो अनछुए सेगहरी कश्ती में डूबे सेजबाव ऐसे मिलेजो […]

आयो फागुन आयो

आयो फागुन आयो,माघ पूनम ,डांडो होली को,गाढ़ो रे गाढ़ो…. वासंती पुरवइया केसंग,फागुन की गर्माहट,शीतल जल को पीबणू,भायो रे भायो… पूनम की होली का फेरा,हार -कंकण […]

नर्मदा

नर्मदा नदी ( हाइकु )

3 मार्च, 2021 सुभाष शर्मा 0

‘हाइकु’ लेखन की एक जापानी विधा है। जो तीन पंक्तियों की होती है, इसमें पहली पंक्ति में पाँच अक्षर,दूसरी पंक्ति में सात अक्षर एवं तीसरी […]

राम राज ( हाइकु )

3 मार्च, 2021 सुभाष शर्मा 0

‘हाइकु’ लेखन की एक जापानी विधा है। जो तीन पंक्तियों की होती है, इसमें पहली पंक्ति में पाँच अक्षर,दूसरी पंक्ति में सात अक्षर एवं तीसरी […]

सद्गुरु प्रीति : सायली विधा

3 मार्च, 2021 मेधा जोशी 0

प्रेममगन मनमंत्र मनन लगननिराकार निरंजनजगतारन भक्तिपरमानंद प्राप्तिसद्गुरु संग प्रीतिमोहे लागीअनुरागी सद्ज्ञाननित्य आवाहनमुक्त करो भवबंधनसद्गुरु शरणनवसृजन अनुग्रहअपार अनंतअखिल अखण्ड सुरेश्वरसदाशिव नटेश्वरजगदीश्वर वरवदनासत्य सनातनशुभ गुण सदनाशुद्ध चेतनाअन्तर्गहना

पिता

28 फ़रवरी, 2021 ममता कानुनगो 0

पिता — संबल और विश्वासउष्णता मे शीतलता का एहसास,,प्रतिकुलता मे आत्मविश्वास जगाते,,,अनुकूलता मे स्वावलंबन का पाठ पढा़ते,,,,हृदय की विषमता को हरनेस्नेह से मुझे गले लगाते, […]

अंजुरी – घनाक्षरी

28 फ़रवरी, 2021 ममता कानुनगो 0

अंजुरी में भर स्नेह,लागी श्याम संग नेह,दधि माखन मिश्री से,कान्हा को रिझाए रही। मन में बसे मुरारी,गोवर्धन गिरधारीचरण धूलि पाकर,आनंद पाए रही। चहक रही चांदनी,महक […]

और शाम ढल दी

28 फ़रवरी, 2021 विनीता बर्वे 0

और शाम ढल दी….जी भर निहारा न था,और घड़ियां चल दी।नैनों से नैन भी न मिल पायें,और रश्मियाँ चल दी। किरणें ज्यों-ज्यों ठंडी हो चली,समय […]

बौराने का आनंद

28 फ़रवरी, 2021 माया कौल 0

माह में मधु का प्रवेश हो रहा है, और जीवन में बसंत का उद्भव,, कामदेव ,,,,,,अपनी सज धज में मगन है,उनकी भावनाएंलता, फूल, पेड़, सब […]

खिलखिलाता बसंत

25 फ़रवरी, 2021 माया कौल 0

बसंत ढेर से रंगों को ,मन में घोल देता है ,,केवल घोलता ही नहीं है,उन रंगों को बिखेर देने को ,आतुर भी दिखता है,कुछ रंग […]

अपराजिता

25 फ़रवरी, 2021 सुषमा शर्मा 0

मेरा जीवन है,हिरनी जैसाउन्मुक्त भरती कुलाँचे,बन-बन भटकती रही,हारी हूँ ना अभी,आगे भी ना हारूँगी।में नारी भारत की,कर्मठ,कठोर ,प्रतिज्ञाओं की पूर्णता हेतु,परीक्षा दे,तारामती भी,अपराजिता बन,गौरवगाथा बननारी […]

ढाई आखर प्रेम का

25 फ़रवरी, 2021 सुषमा शर्मा 1

चल “पडी” थी “जिन्दगी”बे रोक-टोक सुहानी सी,भर लिए थे”आँचल”में,कुछ पल आनंद के,ढाई आखर प्रेम का पढ़कर।ना कोई है अपना,ना था कोई बेगाना,ना है उम्मीद किसी […]

मेरा बसन्त

सखी वसंत ऋतु आई

25 फ़रवरी, 2021 शांता गीते 0

सखी वसंत ऋतु आईजग मऽ खुशहाल छाईमन भावना ऋतु आईसखी मन मऽ उमंग भरी लाईसखी वसंत ऋतु आईमोर नाच्या, कोयल कूकीभवंरा न ताने सुणाईऋतुराज का […]

नर्मदा

नर्मदे हर

जय माँ नर्मदा अमरकंटक से निकली सहस्त्रनामसे जानी जातीनिर्मल जल ले कल कल बहती हर दिशा में…नजर आतीपापियों के पाप धोए दर्शन दे संतोंका मान […]

मेरा बसन्त

मेरा बसन्त

9 फ़रवरी, 2021 प्रभा शुक्ला 1

सुन री सखीआज आँगन में कागा कांव कांव बोला।मन हरष उठा,आएगा कोई अपना प्यारा।री सखी बता दे कौन है वो। उसके आने की आहट हवाओं […]

आनंद

माघ

9 फ़रवरी, 2021 विभा भटोरे 0

माघ माह अलबेला है,आज तू ना अकेला हैजा रहे है आमजन,तू भी चल आनन्द की बेला है।स्नान का पर्व भी होता है!!!देख संतों का रेला […]

भँवरा

मोक्ष

9 फ़रवरी, 2021 वीणा मंडलोई 0

आँखें खोलते ही ,नन्हा भँवराऊपर देखता है ,एक रोशनी उसे बुलाती हैवो उड़ान भरता है ,ज्यादा ऊँची नही ,,बस थोड़ा ही ऊपर ,खुश हो नीचे […]

mask

क्या कहे बीता साल क्या ले गया

किसी बूढ़ी आखों की उम्मीदेंकिसी युवा की ख्वाइशें ।क्या क्या नही ले गया।कहने को पूरा साल था ,लेकिन करने को कुछ नही किया।छोटे छोटे नन्हे […]

मेरा मन

मेरा मन बहुत ही छोटा शब्दलेकिन उड़ान लिए ,बचपन से किशोरावस्था तकगुड़ियों के खेल से घर गृहस्थी तक चलता ही रहता ।कभी मन की होती […]

बाल

बाल मजदूरी

मन चंचल मन बावरा मनसमझ ना पाएखेलने की उम्र में बालक बोझ ढोतानजर आएयह कैसी मजबूरी बचपन हाथों सेनिकला जाएकर में किताब की जगह बोझ […]

जीवन (जी-वन)

8 फ़रवरी, 2021 वाणी गुप्ता 2

हमारा जीवन उस वन की तरह है।जिसमे सब कुछ है हरा-भरालेकिन फिर भी है सुनसान और अकेला ||जिसके एक पल चमकती धूप,तो अगले पल घना […]

समर्पण

नारी। जीवन का मंत्र है समर्पणजिसने स्वयं का सर्व स्व किया अपर्णहर भाव है निश्छल आया न किया न कभी छलत्याग की मूर्ति सेवा में […]

मैं किसे बताऊं

मैं किसे बताऊं

8 फ़रवरी, 2021 पूर्वा शुक्ला 0

सबकी परेशानियों को सुन लूंपर अपनी परेशानी किसे सुनाऊं सबके दर्द की दवा बताऊंपर अपना दर्द मैं किसे दिखाऊं सबके होठों पर मुस्कुराहट लाऊंपर मेरी […]

बसंत

मेरे शहर बसंत आयालहराता मुस्कुरा कर आया पिय से मिलने की सौगात लाया देखकर एक दुजे की हंसी हुई मंदउर में भरी सुंदर स्पद प्रिय […]

वर्ण पिरामिड – शमा, पतंग

विषय: शमा येशमाजलकेदिखाएगीगम के तममे डूबे इंसानको राह बताएगी विषय: पतंग मॉसखासंग मेपतंग लेखूले आसमातले यू उडाउनव वर्ष मनाऊं Photo by Abhishek Upadhyay on Unsplash

बेटी और माँ क्षणिका

क्षणिका – बेटी और माँ

8 फ़रवरी, 2021 ममता कानुनगो 0

बेटी जीवन प्रभा है वो,अंतर्मन की कथा,मर्यादा त्याग समर्पण,बेटी स्नेह बंधन। मां प्यार स्पंदन,महकता चंदन,पवित्र शीतल मन,सलिल सरिता सी,मां तुम अनुपम। Photo by Raghavendra V. […]

बसंत

बसंत

8 फ़रवरी, 2021 सुभाष शर्मा 0

खिल उठी सूर्य किरण,लाली लेकर जागी भोर।बागिया में बोले पपिहा,अमराई में नाच उठे मोर। ओढ़ के दुशाला बासंती,पवन चली लेकर मस्ती।महक उठा जग ये सारा,फूल […]

bachpan

बचपन की यादें

8 फ़रवरी, 2021 पूर्वा शुक्ला 0

खेत के खलियानों के बीच बचपन बितानाछोटी-छोटी खुशियों से जीवन को सजानामाँ की गोद मे ज़न्नत मिल जानाबाबा के प्यार और दुलार से गमों को […]

स्वेटर में बच्चे

बाल गोपाल, करते धमालसुंदर से, न्यारे से, लाल स्वेटर में बच्चेजैसे कोई खिलता हुआ गुलाब,इतना लाजवाबकि कोई सुंदर ख्वाबहमारी आंखों के सामने…लगता है नाचने..बच्चों की […]

प्रार्थना

रक्षा-प्रार्थना

क्या अर्वाचीन और क्या प्राचीनक्या उत्तर और क्या दक्षिणक्या शासक और क्या आधीनक्या नगरीय और क्या ग्रामीणहर क्षण होता प्रकाश क्षीण॥ हाहाकार बढ़ता हर दिनदेव […]

दुल्हन

दुल्हन – ओढ़ के लाल चुनरिया

ओढ़ के लाल चुनरियाचली दुल्हन ससुरालमाथे पर बिंदिया चमकेहाथ चूड़ियां खनके लालओढ़ के लाल चुनरिया मेहंदी का रंग लिए हाथ मेंकजरारी आंखें मे संजोए सपनेछोड़ […]

खुद के भरोसे

भरोसा

7 फ़रवरी, 2021 अनिता शुक्ला 0

चल पड़े थे सुनसान राहों पर ,जहां अंधेरों ने ही घेरा थाउजियारे की कोई उम्मीद न थीएक भरोसा खुद पर थाउसी भरोसे के सहारे चले […]

बिटिया चली ससुराल

करके श्रृंगार बिटिया चली ससुराल

करके सोलह श्रृंगार मेरीबिटिया चली है ससुरालवह नन्हीं सी कली अबफूल बन गई मेरी बगियाछोड़ अपने चमन को चली जहां भी जाएगी अपनीमहक से सबका […]

माँ

माँ

4 फ़रवरी, 2021 सुधा केशरे 0

माँतुम बिनकौन कहेगा अबआजा बेटीमायके कौनजोहे बाटद्वार पर रखेंनयन प्यारभरें कौनपूछे अबसकुशल हो नाअपने घरसपरिवार कौनदे आशीषभरे मेरी झोलीरखे हाथमस्तक माँतुम बिनसुने लगे सारेतीज त्यौहारसंसार […]

प्रकृति

प्रकृति

4 फ़रवरी, 2021 मेधा जोशी 0

फूलों को खिलखिलाता देख,मन मेरा मुस्काया, देख सरित प्रवाह,सुकुन मैंने पाया, ये फुहारें सावन की,जैसे बूंदों की पायल, मन मयूर नाच रहा,अरुष प्रभात जाग रहा, […]