जानि परत सब कोय

जानि परत सब कोय

रहिमन बिपदाहू भली ,
जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में,
जानि परत सब कोय ।।

पाठक वृंद,

सादर वंदे!

महामारी का प्रभाव हमारे जीवन पर कुछ इस प्रकार छाया है कि सामान्य जीवन में उथल-पुथल सी हो गई है। इस विषम परिस्थिति में हमें विचलित ना होकर धैर्यता से काम लेना चाहिए।

रहिमन चुप ही बैठिए,
देख दिनन की फेर।
जब निकै दिन आईहै,
बनत बात नहीं बेर।

रहीम कवि कहते हैं कि धीरज रखने से मनुष्य संकट का समय भी पार पा लेता है।

यदि मुश्किल घड़ी में मनुष्य व्याकुल हो जाता है तो, उसे अच्छा समय आने तक वह पूर्णतः हताश हो जायेगा।

अतः निराश ना रहे सकारात्मक सोच के साथ घर पर रहें सुरक्षित रहें, अपना कर्म करते रहें।

सही समय आने पर आपके कर्मों का फल अवश्य मिलेगा।

धैर्य से आप एक प्रबल व्यक्ति बनते हैं।यह मंत्र खुशी का मंत्र है।

तुलसी साथी विपत्ति के,विद्या विनय विवेक।
साहस सुकृति सुसत्यव्रत,राम भरोसे एक।।

जीवन में प्रत्येक स्थिति का सामना मजबूती से करने की सीख देते हुए तुलसीदासजी कहते हैं।

परिस्थिति कितनी ही विपरीत क्यों ना हो, मनुष्य के यह सात गुण उसकी रक्षा करते हैं।

आपका ज्ञान और शिक्षा, आपकी विनम्रता, आपकी बुद्धि, आपके भीतर साहस, आपके अच्छे कर्म, सच बोलने की आदत और राम, मतलब ईश्वर में विश्वास।

इस वैश्विक महामारी के अचानक हमारे सामने आने से हम विचलित तो हुए ही हैं पर हमें हिम्मत से काम लेना है।

मानव प्रकृति की हर छोटी मोटी गतिविधि से प्रभावित होता है ।

जैसे वर्तमान समय में चल रहा ‘नवतपा ‘ भी हमें सीखाता है।

जितनी तपन सहन करोगे उतनी ही शीतलता बारिश के द्वारा होगी।

सूर्य और चन्द्रमा जब अंतरिक्ष में राशियों में अपना स्थान परिवर्तित करते हैं, तब इस प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवतपा में सूर्य , पंद्रह दिनों के लिए रोहिणी नक्षत्र में निवास करते हैं।

वे अपना सबसे अधिक तापमान नव दिनों तक ही दिखाते हैं, फिर धीरे- धीरे गरमी कम होने लगती है।

इन दिनों में सूर्य हमारी पृथ्वी से कुछ और करीब आ जाता है, अतः सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर पड़ती है।

इस वजह से पृथ्वी पर तापमान में वृद्धि हो जाती है।

रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा है, परंतु उनकी शीतलता भी सूर्य से प्रभावित हो जाती है।

एक मिट्टी का मटका भी आग में तपकर ही जल को शीतलता प्रदान करता है;

उसी प्रकार हमारी धरा भी नवतपा में जितना तपता है उतनी तेज बारिश होती है।

इन कष्टों को सहकर ,तपकर और अधिक निखार लाना है;

हमारी रचनाओं में भी

एक सकारात्मक सोच के साथ

आभार, सम्पादिका डा. भावना बर्वे

शीर्षक : जानि परत सब कोय

Image by Gerd Altmann from Pixabay

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About डॉ. भावना बर्वे 8 Articles
संपादक, शब्दबोध पी. एच .डी., एम. ए.,बी.एड.,डिप्लोमा इन फैशन डिज़ाइनिंग लगभग 20 वर्षो तक शिक्षण कार्य का अनुभव,हस्तकला एवं पाक कला के शैक्षणिक कार्य मे 25 वर्षो से संलग्न
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Kavita pagare
Kavita pagare
1 month ago

बहुत सुंदर

कल्पना उपाधयाय
कल्पना उपाधयाय
1 month ago

Bahut badhiya Bhawna ! 👌👌👌👍

विभा गावशिंदे
विभा गावशिंदे
1 month ago

बहुत सुंदर

दामिनी पगारे
दामिनी पगारे
1 month ago

👌👌👌👌