अवतार

विष्णु के अवतार

शीर्षक: विष्णु के अवतार

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।

धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।।


भगवान कहते हैं, कि प्रत्येक युग में मैं धर्म की स्थापना व विशिष्ट कार्य हेतु अवतार लेता हूँ |

तो क्या भगवान सच में अवतार लेते है ?

हम उनके आध्यात्मिक जीवन तत्वों के मूल्य, धार्मिक तत्त्व और उनके मूलभूत सिद्धांत पर विचार करें, तो पायेंगे कि विषय कितना महान है और बुद्धि कितनी अल्प, वाणी कितनी सीमित और असमर्थ, यह कार्य कितना कठिन है ।

हम इस अविनाशी तत्त्व को जानने का प्रयत्न करते हैं| उस महान दिव्यात्मा के सामने विश्व में सभी कुछ फीका लगता है ।

जिस दिव्यात्मा ने इस सृष्टि का निर्माण किया है, उसका पालन-पोषण करता है, उसकी रक्षा के लिए स्वयं सृष्टि में अवतार रूप आता है।

इसके समान कोई मधुर कल्पना ही नहीं है ।

सृष्टि एक सूर्यमाला है, और प्रभु उसका सृजनहार है, कितनी अद्भूत शक्ति है उनमें ।

ऐसे सृष्टि के उत्पादक, विश्वनिर्माता, विश्वनियंत्रक और उनके अवतारों के संबंध यें विचार करना, बौद्धिक विश्लेषण करना कितना मुश्किल है, बुद्धि ही काम नहीं करती।

सृष्टिकर्ता के बारे में विचार करने के लिए हमें पूज्यभाव व नम्रता लानी पड़ेगी, तभी हम उसे जान पायेंगें|

हमारे हिन्दू पुराणों के अनुसार सृष्टि चालक अवतार लेते हैं।

ये किसी विशिष्ट कार्य के लिए ही अवतरित होते हैं।

इनमें ईश्वरीय चैतन्यता होती है।

अवतार में पूर्णब्रह्म स्वयं सृष्टि में आता है।

सृष्टि का निर्माण करने में औपनेषिक दृष्टि से देखें तो सत्व, रज, तम इन गुणों का सहयोगात्मक संघर्ष रहता है|

पौराणिक दृष्टि से ब्रह्मा, विष्णु, व रूद्र ये तीनों भिन्न-भिन्न नाम परन्तु एक ही चित्त शक्ति से सृष्टि में एक ही कार्य करते हैं|

सृष्टि का चक्र अवरुद्ध होता है, तभी ये अवतार लेते हैं|

वैसे भारतीय संस्कृति के आदर्शों को व्यावहारिक जीवन में मूर्तिमान करने के लिए विष्णुजी ने अवतार लिए |

वैसे दस अवतार मुख्य है | श्रीमद् भागवत के अनुसार २४ अवतारों की श्रृंखला मिलती हैं |

इन अवतारों के द्वारा उन्होंने व्यक्ति और समाज को विकसित करने के लिये अपने चरित्र किये |

सभी अवतारों का प्रयोजन यही रहा है |

दस मुख्य अवतार जो माने गये है वे है,

  • मत्यावतार,
  • कूर्मावतार,
  • वाराहअवतार,
  • नृसिंहअवतार,
  • वामनावतार,
  • परशुरामअवतार,
  • श्रीरामावतार,
  • श्रीकृष्णावतार,
  • बुद्धावतार,
  • व कल्किअवतार

श्रीमद् भागवत के अनुसार विष्णुजी के २४ अवतार माने गये हैं, वे इस प्रकार हैं –

  1. सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार ये भगवत भजन व हमेंशा पाँच साल की उम्र के रहे |
  2. वाराह अवतार में हिरण्याक्ष का वध करके पाताल से पृथ्वी को उपर लाकर स्थिर किया |
  3. यज्ञ पुरुष के रूप में संसार को यज्ञ करने की विधि बताई |
  4. हयग्रीव अवतार में मधुकैटभ को मारकर वेद शाश्त्रो को बचाया |
  5. नारायण अवतार में बदरी-केदार में तपस्या करके संसारी लोगो को तपस्या की प्रेरणा दी |
  6. कपिल मुनि अवतार में माता देवहूति को सांख्ययोग की शिक्षा दी |
  7. दत्तात्रेय अवतार में ज्ञान की शिक्षा दी व २४ गुरु बनाये |
  8. ऋषभदेव अवतार में जैन धर्म का प्रचार किया |
  9. राजा पृथु ने पृथ्वी को सारी वनस्पति को इकट्ठा करके उत्तराखंड में स्थापित कर पृथ्वी पर प्राणियों का निवास स्थान बनाया |
  10. मत्स्यावतार में राजा सत्यव्रत को प्रलयकाल का प्रत्यक्ष दर्शन कराया |
  11. कच्छप अवतार में समुंद्रमंथन के समय मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया |
  12. धन्वन्तरी अवतार में वैद्य के रूप में सारी औषधि व वनस्पति को समुद्र से बाहर निकाला |
  13. मोहिनी अवतार में अमृत देवताओं को दिया |
  14. नृसिंह अवतार में हिरण्यकश्यप से प्रह्लाद की रक्षा की |
  15. वामनावतार में राजा बलि से तीन पग भूमि दान में लेकर देवताओं को दी |
  16. हंसावतार में सनत्कुमार को ज्ञान का उपदेश दिया |
  17. नारायण अवतार में भक्त ध्रुव को साक्षात् दर्शन दिये |
  18. हरि अवतार में ग्राह का संहार कर गजेंद्र की रक्षा की |
  19. परशुराम अवतार में अधर्मियों का नाश किया |
  20. रामचंद्र अवतार में असुरो सहित रावण का वध किया |
  21. वेदव्यास अवतार में वेद के चार भाग किये व १८ पुराणों की रचना की |
  22. कृष्णावतार में अधर्म का नाशकर धर्म की स्थापना की व कई चरित्र किये |
  23. बुद्ध अवतार में राक्षसों का मन यज्ञ करने से हटाया |
  24. कल्कि अवतार – ये कलियुग के अंत में होगा |     

इस प्रकार विष्णुजी ने सृष्टिकर्ता, विश्वनिर्माता, व नियंत्रक के रूप में व आध्यात्मिक तत्वों के मूल्य, धार्मिक तत्त्व व उनके मूलभूत सिद्धांतों को समझाने के लिए व हर विशिष्ट कार्यो को पूर्ण करने के लिए ही अवतार लिए |

अतः हम मान सकते हैं की विश्व व मानव कल्याण हेतु अधर्म से धर्म की स्थापना के लिए समय-समय पर भगवान् अवतरित होते रहे हैं |

ऐसे सृष्टिकर्ता व निर्माता को कोटि कोटि नमन |

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