कृषि प्रधान हमारा भारत उत्सवों का देश है जहां चैत्र माह से फागुन माह तक पर्व त्यौहार की अदस्त श्रृंखला है आनन्द के साथ ही पर्व जीवन के सामाजिक धार्मिक आध्यात्मिक उद्देश्यो की पूर्ति भी करते हैं
गणगौर निमाड़ में चैत्र वही दशमी से चैत्र सुदी तीज तक ९ दिनों तक मनाया जाने वाला प्रमुख अनुष्ठानी पर्व है यह मात्र देवी गौरा और शिव की उपासना का पर्व है ज्वारों के रूप में फसल कटाई की खुशी का कृषि पर्व है जिसमें देवी रुप अनाज को प्रतिष्ठा दी गई है
होली की राख से चुने गये कंकरो को देवी गौरा को रूप में प्रतिष्ठित कर बांस की छोटी छोटी टोकनियो में मिट्टी भर कर गेंहू बोये जाते हैं जिसकी सुमधुर गीतों सहित पवित्र जल से सींचते हुए देवी रुप में पूजा की जाती है
रणु देवी और उनके पति धनियर राजा सूर्य के संवाद के रूप में चलते हैं अतः प्रकृति पूज्य पर्व है सुख समृद्धि संतान सौभाग्य की कामना से मनाया जाना हमारा गणगौर पर्व त्यौहार नारी जीवन का सुमधुर गीत काव्य है रणु बाई इन गीतों की अधिष्ठात्री देवी है रणु बाई धनियर राजा शिव पार्वती के प्रतीक स्वरूप पूज्य है बेटे दामाद की तरह माननीय भी है
\”