50 के बाद अपना आकाश: स्त्रियों की उड़ान

स्त्रियों को बचपन से मिला “सुरक्षित आकाश”, असुरक्षा के घेरे में उड़ान की सीमाएँ, और फिर 50 के बाद अपने सामाजिक दायरे, दोस्तों, चाय पार्टियों, घूमने तथा सजने-संवरने के साथ तृप्त होकर जीने का आत्मकथात्मक अनुभव।

जल ही जीवन है: जल के संरक्षण और नदियों को स्वच्छ रखने की अपील

प्रकृति प्रदत्त जल के महत्व, वर्षा जल संरक्षण के उपाय, घर-ऑफिस में पानी बचाने की आदतें, और नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए अनुशासन व नियमों की आवश्यकता पर लेख।

ओशो के प्रवचनों में कबीर: “सुनो भाई साधो” के कुछ अंश

ओशो के प्रवचनों के अंतर्गत “प्रेम के पथिक” में “सुनो भाई साधो” प्रवचन से कबीर के बारे में साझा किए गए कुछ अंशों की प्रस्तुति।

रामनाम की महिमा: मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का विश्लेषण

इस लेख में “राम” शब्द के अर्थ, राम नाम की कल्पतरु-सम जीवनदायिनी महिमा, तुलसीदास व अन्य संतों के संदर्भ, तथा “पूर्ण ब्रह्म” के रूप में सीताराम के नाम-विग्रह का वर्णन है।

ईश्वर पर भरोसा: टूटने के बाद भी नया उल्लास

इस लेख में प्रकृति के नियमों और उनके उदाहरणों के माध्यम से बताया गया है कि समय के साथ परिवर्तन जरूरी है। साथ ही यह भी कि मानव जीवन की टूटन, कष्ट और अवसाद के बाद ईश्वर नई ऊर्जा, नई शुरुआत और शुभ सुबह लेकर आ सकता है—इसलिए आशावादी और सकारात्मक रहना चाहिए।

गणगौर पर्व: निमाड़ में चैत्र से सुदी तीज तक 9 दिनों की कृषि-आस्था और रुणु बाई के गीत

यह लेख गणगौर पर्व के सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व, निमाड़ में चैत्र सुदी तीज तक 9 दिनों तक मनाए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान, देवी गौरा-शिव परंपरा, ज्वार रूप में फसल कटाई की खुशी, होली की राख से बने कंकरों और रुणु देवी व धनियर राजा (सूर्य) के संवाद-परंपरा का वर्णन करता है।

मेरे गाँव का वो बुढा बरगद: प्रेम, रिश्ते और बुढ़ापे की विरासत

इस निबंध में लेखक ने अपने गाँव की मिट्टी की खुशबू, खेतों की हरियाली, संयुक्त परिवार की आत्मीयता और चौक में खड़े बुढ़ा बरगद के पेड़ की यादों, छाया और पीढ़ियों से जुड़ी भूमिका को भावपूर्ण ढंग से रेखांकित किया है। अंत में बुढ़ा बरगद को समर्पित एक छोटी कविता भी है।

रामनाम की महिमा: मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम

“राम” शब्द की शीतलता, मर्यादा और उत्साहवर्धन से लेकर राम नाम को कल्पतरु, कलि-कल्याण निवासु तथा पूर्ण ब्रह्म सीताराम के रूप में मानने तक—राम नाम जप की महिमा और उसके अर्थ का भावपूर्ण वर्णन।