दिनेश और सुनीता के बीच दूरियाँ, यादें और नाराज़गी होली के रंगों में घुल जाती हैं। छुट्टी के दिन की प्रतीक्षा से शुरू होकर घर लौटने तक की भावनात्मक कहानी—“होली का उपहार”।
जानवी के जीवन में कला की गहरी रुचि, परिवार की परिस्थितियों के बीच संघर्ष, बच्चों को पढ़ाने से लेकर मास्टर डिग्री, स्वर्ण पदक और एक अध्यापिका के रूप में नई पहचान तक की प्रेरक कहानी।
नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या भोजन के लिए गई नन्ही वैष्णवी देर से लौटती है। तलाश के दौरान मंदिर में उसका खून से लथपथ और मृत शव मिलता है। पिता की बदहवास चीखों के साथ बताया जाता है कि आस-पास रहने वाले व्यक्ति ने बच्ची को बहला कर कुकर्म किया।
इस कथा में असुर रक्तबीज के अत्याचार से देवताओं की परेशानी, ब्रह्माजी से प्राप्त वरदान के अनुसार पराक्रमी कन्या के रूप में माँ दुर्गा का प्रकट होना, तथा शिवजी और अन्य देवताओं द्वारा दिव्य अलंकार व अस्त्र प्रदान करने का वर्णन है। साथ ही देवी को आदि शक्ति/सृष्टि की मूल शक्ति माना गया है।
दादाजी की बताई हुई एक बहुत पुरानी घटना: गाड़ियों पर सवार मेले जाती महिलाएँ, चोरों का हमला, और दादाजी की पहलवानी से चोरों का भाग जाना—पूरी कहानी विस्तार से।
कॉलेज की सहेली सुदर्शना से सब्जी खरीदते समय अचानक मुलाकात होती है। वह अपने पति के व्यस्त होने के बावजूद समाज सेवा करती है और समाचार पत्रों में छपे फोटो व भाषणों के वीडियो दिखाती है। उसकी बेटी-बेटा समानता और जनसंख्या नियंत्रण पर प्रभावशाली बातें, छह बेटियों के साथ उसका जीवन—सब कुछ मिलकर एक प्रेरक किस्सा बनता है।
यह कहानी रीता दास के साथ हुई धोखाधड़ी, फर्जी वादों के जाल, कर्ज के दबाव, पुलिस की पूछताछ और अंततः उनके अचानक गायब हो जाने तक की घटनाओं का वर्णन करती है।