कुहू का आँचल: सौतेली माँ की ममता

भोली कुहू क्या जाने माँ का आँचल क्या होता है, जन्म के कुछ महीनों बाद माँ छोड़ गई।पिता ने दूसरी शादी कर ली ।रूपा जो सौतेली माँ ने कभी कुहू को अपनी बेटी नहीं माना कुहू कहीं से भी आती माँ माँ करके गले लग जाती ।

रूपा को पसंद न होने से दूर धका देती ।भूखी प्यासी बच्ची फिर माँ करके आप मुझे ऐसे क्यों डांटते हो सबकी मां तो बहुत प्यार करती हैं खाने को भी देते हैं रूपा डांटकर कहती में तेरी माँ नही हूँ कहा ना मैंने ।आप मेरी माँ नही हैं तो कौन है किसे अपनी माँ कहूं ।पिता इन सबसे अनजान ,माँ बेटी की बातें सुनकर बोला ये मासूम कहाँ जाए माँ का आँचल ढूँढने ।

रूपा चिल्लाकर कहती मैंने इसे जन्म नहीं दिया फिर में क्यों अपने आँचल में रखूं।में अपना सारा लाड़ प्यार अपने बच्चे के लिए रखूंगी ।पिता के बहुत समझाने पर कुहू नही समझती फिर माँ करती रूपा ने आज हाथ उठा दिया।दया नहीं आई मारते ।

रूपा अगले दिन चेकप के लिए गई पर रिपोर्ट में रूपा कभी माँ नही बन सकती आया । कई जगह झाड़ा फूंकी करवाई पर कुछ नहीं हुआ। जब दिनेश को ये बातें पता चली तो दिनेश ने समझाया शायद इसीलिए तुम्हारी कोख सुनी रखी ईश्वर ने कि तुम कुहू को अपनी बेटी मान उसकी परवरिश कर सको।अपनी बेटी बनाकर रखो।

ये सब सुन रूपा फूट फूट कर रोने लगी और जाकर कुहू को गले लगाकर बेटा में ही तेरी माँ हूँ मुझे माफ कर दे बेटा आज ये पत्थर दिल पिघल गया।कुहू को आँचल में छुपा लिया।