पुस्तकों का मान: ज्ञान की भव्य शिवाला

पुस्तकों से है, हमारा सबका नाता
पढ़कर पुस्तकें, व्यक्ति ज्ञान पाता।
पुस्तकों को हम सब रखें , सम्भाल,
पुस्तकें है, हमारी भाग्य -विधाता!!

पुस्तकों जैसा नही है, कोई साथी,
पढ़कर बनती है, व्यक्ति की थाती,
पोथी पढ़कर बन गए है, महान,
तुलसी, कबीर, सूर, मीरा की पाती!!

पुस्तकें है, साहित्य का दर्पण,
कवि, लेखकों का इन्हें जीवन अर्पण,
साहित्य सृजन का करो मान,
अन्तर की गाथा, सैकड़ों समर्पण!!

अकेले में पुस्तकें मन बहलाती,
ज्ञान से वैतरणी पार कराती,
ऋषि-मुनियों ने भी ज्ञान पाया,
पुस्तकें सदा, सम्मान है दिलाती!!

गुरूकुल हो या हो, पाठशाला,
पुस्तकों का आश्रय है, निराला,
सब मिल करो पुस्तकों का मान,
पुस्तकें है ज्ञान का, भव्य शिवाला!!