सुरभी का प्रवचन: गृहस्थाश्रम में सच्चा संत

सुरभी प्रवचन सुनने जाने का निर्णय लेती है, लेकिन प्रशान्त के व्यवहार और त्यागपूर्ण प्रेम उसे असीम शांति देता है। कहानी के अंत में बताया गया है कि गृहस्थाश्रम में विरक्त भाव रखने वाला ही सच्चा संत है।

तुम्हारे प्रेम का जादू: प्रेम कविता

इस कविता में प्रियतम के आने से जीवन में आई खुशियों, अपनापन, और प्रीत के जादू का सुंदर भाव-प्रवाह व्यक्त हुआ है।

काश, ऐसी होली अबके बरस आयें – रंग, प्रेम और करुणा की कविता

यह कविता “काश, ऐसी होली अबके बरस आयें” की भावभूमि पर अहंकार, ईर्ष्या और बैर को मिटाकर प्रेम, करुणा, भक्ति तथा नारी सुरक्षा व प्रकृति की खुशहाली की कामना करती है।

जल ही जीवन है: जल के संरक्षण और नदियों को स्वच्छ रखने की अपील

प्रकृति प्रदत्त जल के महत्व, वर्षा जल संरक्षण के उपाय, घर-ऑफिस में पानी बचाने की आदतें, और नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए अनुशासन व नियमों की आवश्यकता पर लेख।

मेरे गाँव का वो बुढा बरगद: प्रेम, रिश्ते और बुढ़ापे की विरासत

इस निबंध में लेखक ने अपने गाँव की मिट्टी की खुशबू, खेतों की हरियाली, संयुक्त परिवार की आत्मीयता और चौक में खड़े बुढ़ा बरगद के पेड़ की यादों, छाया और पीढ़ियों से जुड़ी भूमिका को भावपूर्ण ढंग से रेखांकित किया है। अंत में बुढ़ा बरगद को समर्पित एक छोटी कविता भी है।

कविता: शांत रस में मुरलीधर कान्हा की आराधना

यह कविता “शांत रस” में मुरलीधर कान्हा/गिरधारी के प्रति समर्पण, प्रतीक्षा, विश्वास और अंतिम क्षण की विनती व्यक्त करती है।

स्वतंत्रता और खुशियों की बिदाई (2020-2021) – जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी

“सन् 2020–2021” के संदर्भ में लिखी गई यह कविता स्वागत, बिदाई, दर्द-आंसू और फिर स्वतंत्रता, प्रेम व सद्भाव के बीज बोने की प्रेरणा देती है। कैद-सी स्थिति से बाहर निकलकर उम्मीदों को संजोने का संदेश इसमें है।