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50 के बाद अपना आकाश: स्त्रियों की उड़ान
स्त्रियों को बचपन से मिला “सुरक्षित आकाश”, असुरक्षा के घेरे में उड़ान की सीमाएँ, और फिर 50 के बाद अपने सामाजिक दायरे, दोस्तों, चाय पार्टियों, घूमने तथा सजने-संवरने के साथ तृप्त होकर जीने का आत्मकथात्मक अनुभव।