50 के बाद अपना आकाश: स्त्रियों की उड़ान

स्त्रियों को बचपन से मिला “सुरक्षित आकाश”, असुरक्षा के घेरे में उड़ान की सीमाएँ, और फिर 50 के बाद अपने सामाजिक दायरे, दोस्तों, चाय पार्टियों, घूमने तथा सजने-संवरने के साथ तृप्त होकर जीने का आत्मकथात्मक अनुभव।

पटेल दादा की कोरोना-भागदौड़: एम्बुलेंस वाला किस्सा

बहार के मौसम की तरह फैले कॅरोना के डर, पहले लक्षणों से लेकर फिर सावधानी और एम्बुलेंस की नौबत तक—एक परिवार की हास्य-व्यंग्य भरी कहानी।

जीवन और मन की बेपरवाही: एक कविता

इस कविता में समय के सरकने, आत्मविश्वास और संबंधों की निभाई जाने वाली मजबूरियों, तथा मन के टूटने-फिर जुड़ने की भावनात्मक यात्रा को शब्दों में पिरोया गया है।