भक्ति कविता: तुम मार्ग मेरा प्रशस्त करो

“तुम मार्ग मेरा प्रशस्त करो” भाव से रचित भक्ति-कविता, जिसमें प्रभु से शीत-हरण, संताप-हरण और मोह-लोभ से मुक्ति की प्रार्थना है।