दान का महत्व: राधेश्याम बाबू की कार यात्रा

दिन भर की थकान के बाद राधेश्याम बाबू परिवार के साथ शहर से गांव लौटते हैं। रास्ते में एक चोकिदार को मिले दस रुपए के माध्यम से परिवार दान और मदद की सोच पर बातचीत करता है।

कब सोचा जिंदगी इतनी थम जायेगी — कोरोना पर कविता

कोरोना के कारण बदली हुई जिंदगी, घर-परिवार तक सीमित दिनचर्या, और इस कठिन समय में आशा की सीख—यह कविता उन्हीं भावों को शब्द देती है।