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घरेलू हिंसा की हद: शुभि का निर्णय
शुभि अपने घर की बदली हुई खुशियों को याद करती है और देखती है कि उसका रिश्ता रोज़-रोज़ हिंसा और शक में बदलता जा रहा है। जब प्रशांत बच्चों तक पर हाथ उठाता है, तो शुभि टूट जाती है और एक निर्णायक कदम सोचने पर मजबूर हो जाती है।