नारी: दो नदियाँ—मायका और ससुराल का किस्सा (राजश्री सिकरवार)

यह कविता नारी के दो रूपों—मायका और ससुराल—को दो नदी की धाराओं की तरह चित्रित करती है, जहाँ परिवार के रिश्ते, अपनत्व, ममता और सम्मान मिलकर नारी को सागर-सी गहराई देते हैं।