विधाता की लीला अपरंपार है – कविता

विधाता की लीला अपरंपार—कहीं खुशियां, कहीं गम; कहीं अंधकार, कहीं सूर्य की रोशनी; झूठ-फरेबी और इमानदारी; बारिश-सूखा—अद्भुत संसार पर यह कविता है।

एक माँ की उम्मीद और बेटे की त्रासदी

एक माँ अपने बेटे की अधिकारी बनने की खुशी में मिठाई बनाती है, समय के साथ जीवन में सुकून आता है, फिर अचानक बीमारी, लाखों खर्च, और कोमा के बाद बेटे की मौत—जिसमें भ्रष्टाचार/धोखे की आशंका भी उठती है।