Posted inकविता विधाता की लीला अपरंपार है – कविता विधाता की लीला अपरंपार—कहीं खुशियां, कहीं गम; कहीं अंधकार, कहीं सूर्य की रोशनी; झूठ-फरेबी और इमानदारी; बारिश-सूखा—अद्भुत संसार पर यह कविता है। Posted by सरिता अजय जी साकल्ले जनवरी 5, 2026
Posted inकहानी एक माँ की उम्मीद और बेटे की त्रासदी एक माँ अपने बेटे की अधिकारी बनने की खुशी में मिठाई बनाती है, समय के साथ जीवन में सुकून आता है, फिर अचानक बीमारी, लाखों खर्च, और कोमा के बाद बेटे की मौत—जिसमें भ्रष्टाचार/धोखे की आशंका भी उठती है। Posted by सरिता अजय जी साकल्ले जनवरी 5, 2026