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पाखंड पर करारा कटाक्ष: बिना गुरु कैसे पाएगा हरि?
यह कविता सही-गलत की उलझनों, ग्रंथ पढ़ने की बजाय सच्ची भक्ति, मंदिर-मस्जिद की दिखावटी आस्था और दीन-हीन की उपेक्षा जैसे पाखंडों पर सवाल उठाती है। इसमें गुरु के बिना प्रभु-प्राप्ति और प्रतिमा-पूजा के दिखावे पर भी तीखा संदेश है।