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मेरे गाँव का वो बुढा बरगद: प्रेम, रिश्ते और बुढ़ापे की विरासत
इस निबंध में लेखक ने अपने गाँव की मिट्टी की खुशबू, खेतों की हरियाली, संयुक्त परिवार की आत्मीयता और चौक में खड़े बुढ़ा बरगद के पेड़ की यादों, छाया और पीढ़ियों से जुड़ी भूमिका को भावपूर्ण ढंग से रेखांकित किया है। अंत में बुढ़ा बरगद को समर्पित एक छोटी कविता भी है।