Posted inकविता विधाता की लीला अपरंपार है – कविता विधाता की लीला अपरंपार—कहीं खुशियां, कहीं गम; कहीं अंधकार, कहीं सूर्य की रोशनी; झूठ-फरेबी और इमानदारी; बारिश-सूखा—अद्भुत संसार पर यह कविता है। Posted by सरिता अजय जी साकल्ले जनवरी 5, 2026