सुरभी का प्रवचन: गृहस्थाश्रम में सच्चा संत

सुरभी प्रवचन सुनने जाने का निर्णय लेती है, लेकिन प्रशान्त के व्यवहार और त्यागपूर्ण प्रेम उसे असीम शांति देता है। कहानी के अंत में बताया गया है कि गृहस्थाश्रम में विरक्त भाव रखने वाला ही सच्चा संत है।