श्रीराम जय राम जय जय राम: भक्ति कविता

जबलपुर (म.प्र.)

श्रीराम जय राम जय जय राम।
श्रीराम जय राम जय जय राम।
श्रीराम जय राम जय जय राम।
श्रीराम जय राम जय जय राम।

दशरथ नंदन कौशल्या सुत
हनुमत के प्रिय राजा राम
धर्मयज्ञ से जन्म लिए प्रभु
कुलदीपक रघुकुल में राम।

त्रेमाता अरु गुरू वशिष्ठ की
आज्ञा गुरूकुल जावें राम
भरत,शत्रुघ्न,लखन अग्र प्रभु
ब्रह्मज्ञान को पावें राम।

कुटिल मंथरा कैकयी की सुन
दशरथ राज दिए वनवास
कुल की रीत का मान धरें प्रभु
आदर्शों पर थाङे राम।

सिया लखन संग वनवन भटके
चौदह बरस बिताए राम
रावण का संहार किए प्रभु
भक्त का मान बढाए राम।

सगुण सुंदर आत्माभिराम
कमलनयन प्रभु निजसुखधाम
जानकी वल्लभ सीताराम
रघुपति राघव राजाराम।

परम् परात्मक सगुणअनामय
भक्तों के दुख भंजक राम
सकल चराचर एक ही देव
पतितपावन सीताराम।

लोकहितकरी देवचराचर
वनवन धावें ज्ञाननिधान
असुर संहारक सुरवर पावक
रघुकुल नंदन जय श्रीराम।

श्रीराम जय राम जय जय राम।
श्रीराम जय राम जय जय राम।
श्रीराम जय राम जय जय राम।
श्रीराम जय राम जय जय राम।

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