कब सोचा जिंदगी इतनी थम जायेगी
न आफीस होगा, न बाजार होगा
दिन रात बस घर में, में और मेरा परिवार होगा
कब सोचा था मानव इतना लाचार होगा
न अपनों से मेल, न दोस्तों से मुलाकात
सुबह-शाम बस:-रामायण, महाभारत व समाचार का आधार होगा
कब सोचा था गांव-शहर , मोहल्ला इतना सुन सान होगा
न शादी विवाह के पकवान, न पार्टियों कि धूम
दोपहर-शाम सिर्फ:- दाल, रोटी व अचार होगा
कब सोचा था बस सिर्फ पक्षियों कि चिल-चिलाहट व उनका राग-दरबार होगा
मत घबराओ दोस्तों :-शासन प्रशासन ,डाक्टर, पुलिस है न
यह सोच लो जल्द हि कोरोना महामारी का अंत व पुन: देश में खुशहाली का त्योहार होगा