Posted inकविता हाथों से फिसलती रेत: धोखा और दूरी पर कविता मीठी बातों के जाल, अपने-पराए होते रिश्तों, तपती गर्मी और जीवन में आती भयानक सुबह—इन सबके चित्रण में रचा गया यह काव्य। Posted by विजय जोशी शीतांशु जनवरी 5, 2026