यह कविता कोमल भावनाओं, कवि-हृदय की कल्पना, प्रकृति की सुंदरता, ममत्व की पुकार और प्रियतम के प्रेम जैसे भावों की मधुर अभिव्यक्ति को शब्दों में पिरोती है।
नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या भोजन के लिए गई नन्ही वैष्णवी देर से लौटती है। तलाश के दौरान मंदिर में उसका खून से लथपथ और मृत शव मिलता है। पिता की बदहवास चीखों के साथ बताया जाता है कि आस-पास रहने वाले व्यक्ति ने बच्ची को बहला कर कुकर्म किया।