कोरोना के बाद शहर में संघर्ष और गांव लौटने का फैसला

\”कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि जीवन में इस प्रकार के दिन भी देखने पड़ सकते हैं!\”

\”जब गांव से शहर आये थे रोजगार की तलाश में, तब कितने सपने देखे थे ! कहाँ सोचा था कि कभी कोरोना नाम की महामारी आयेगी और सारे सपनों पर पानी फेर देगी !\”

\”बचत की राशि भी कितने दिन तक चलने वाली है ! उसके बाद फिर हमारा क्या होगा ?\”

\”हाँ ! लेकिन अब हम करें भी तो क्या करें! सारे रास्ते बंद हो गए है!और ऊपर से ये बढ़ता संक्रमण! अब तो शहर में जिंदा रहना भी बहुत मुश्किल लग रहा है!\”

\”करें भी तो क्या करें ?\”

\”चलो मेरे साथ!\”

\”कहाँ ?\”

\”वापस गांव में खेती करेंगे …!\”