नवरात्रि की थाली हर क्षेत्र में एक जैसी नहीं होती। कहीं साबूदाना पकता है, तो कहीं चने पर करी पत्ते और नारियल का तड़का लगता है। तमिलनाडु के गोलू में ऐसा ही एक स्वाद है सुंडल।
गोलू दक्षिण भारत में शरद नवरात्रि के दौरान मनाई जाने वाली एक खास परंपरा है। इसमें घरों में सीढ़ीनुमा मंच पर देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, गुड्डे-गुड़ियाँ और रोज़मर्रा के जीवन की झाँकियाँ सजाई जाती हैं।
गोलू में सजाई गई गुड़ियों और प्रतिमाओं के साथ प्रसाद बाँटने की परंपरा भी जुड़ी है। सुंडल उसके परिचित व्यंजनों में शामिल है। यह काबुली चने वाला संस्करण है।
यह गोलू का प्रसाद है। चना और सामान्य नमक वाला यह संस्करण अनाज-दाल छोड़ने वाले नवरात्रि व्रत का फलाहार नहीं है।
कितने लोगों के लिए: 4 (एक-एक छोटी कटोरी)। भिगोने का समय: 8–10 घंटे। तैयारी का समय: 10 मिनट। पकाने का समय: लगभग 35 मिनट। कुल समय: लगभग 45 मिनट, भिगोने का समय अतिरिक्त।
सामग्री
- सूखे काबुली चने — 150 ग्राम
- ताजा कद्दूकस नारियल — 4 बड़े चम्मच
- तेल — 2 छोटे चम्मच
- राई — ½ छोटा चम्मच
- धुली उड़द दाल — 1 छोटा चम्मच
- करी पत्ते — 8–10
- सूखी लाल मिर्च — 1, दो टुकड़ों में
- हींग — एक चुटकी; नमक — स्वादानुसार
- पानी — भिगोने के लिए पर्याप्त, पकाने के लिए लगभग 600 मिलीलीटर
बनाने की विधि
- चने धोकर पर्याप्त पानी में रातभर भिगोएँ। सुबह पानी निकालकर फिर धोएँ।
- ताजे पानी के साथ कुकर में पूर्ण दबाव आने के बाद धीमी आँच पर लगभग 20 मिनट पकाएँ। दबाव अपने-आप उतरने दें।
- चना उँगलियों से दबाने पर नरम हो, लेकिन बिखरे नहीं। जरूरत हो तो और पकाएँ; फिर पानी छानें।
- तेल में राई चटकाएँ। उड़द दाल हल्की सुनहरी करें, फिर मिर्च, करी पत्ते और हींग डालें।
- चने और नमक मिलाकर 2–3 मिनट चलाएँ। नारियल डालें, एक मिनट बाद आँच बंद करें।
सुंडल का स्वाद कैसे उभरेगा?
यह गाढ़ी ग्रेवी वाला चना नहीं है। इसे छोटी कटोरी में परोसें ताकि नारियल और तड़के की खुशबू साथ महसूस हो। मिर्च का तीखापन हल्का रखें; चने का अपना स्वाद दबना नहीं चाहिए।
काले चने से बना सकते हैं? हाँ, लेकिन उन्हें नरम होने में अलग समय लग सकता है। घड़ी से ज्यादा दाने को दबाकर जाँचना काम आएगा।
उबले चने बच गए हों तो? लगभग 350 ग्राम पके, छने चने लेकर सीधे तड़के वाले चरण से शुरू करें।
आपने नवरात्रि में गोलू देखा है? वहाँ मिला कोई खास प्रसाद याद हो तो बताइए।
