माँ की याद में एक कविता

माँ की याद में एक कविता

साँवली सलोनी
भोली-भाली मेरी
माँ की सूरत
लगती जैसे की
भगवान की मूरत

नहीं कोई कीमती
शृंगार मेरी माँ का
माथे पर बिंदिया
ख़ुशी की आंखों में
चमक लबों पर
मधुर मुस्कान

हम सब की जीने
की आस
जब से गई
हो मां तुम
घर आँगन सुना
सुनी मेरे बाबुल
की अँखियाँ

सूना तुम बिन
मां सारा संसार
तुम बिन नहीं
महके रसोई
न आये अचार
में स्वाद

ढीली पड़ गई
माँ मेरी मायके
की डोर
फीके हो गए
मां तुझ बिन
मेरे सारे त्यौहार

जब भी तेरी
माँ याद सताये
धीरज बंधाये
माँ तेरी प्यारी
सी मुस्कान
माँ तेरे पद
चिन्हों पर चलकर
जीवन का सुख
पाऊं तेरी लाड़ली
बन कर माँ
तेरा मान बढ़ाऊँ

माँ जब कोई
कहे मैं तेरी छवि
हूँ सुनकर मैं

माँ
खुद पर ही
इतराऊँ
देख आईना तुझे
निहारूं माँ
तेरे आशीष से
सौ जन्मों तक
सुख पाऊँ माँ।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *