नारी अस्मिता पर कविता

नारी अस्मिता पर कविता

नारी अस्मिता
आज प्रश्न बन गई।
मातृ देवो भव
संस्कृति धूमिल पड़ गई।

गाली दी जाती है तो
औरत के नाम पर।
सदा डराई जाती
इज़्ज़त के नाम पर।

मजबूर की जाती है
छल और बल से।
प्रखर हो गई तो
दबा दी जाती है।

मुखर हुई तो
ताने ही पाती है।
क्यों इतना निर्दयी हो रहा संसार
सच मे नारी क्या इतना सताती है?

नदियां सूख रही
दूषित हो कर
बेटियां रो रही
अपमानित हो कर।

बेटी को सम्भालो
जिम्मेदारी तुम्हारी है।
नारी का मान बचाओ
की यह जननी तुम्हारी है।