नववर्ष 2021 के स्वागत में कविता

नववर्ष 2021 के स्वागत में कविता

सन् 2020 –2021

तेरे स्वागत में हमनें बाहें फैलाई
मेहमान ही रहा तू अपना ना बना
तू गिना जाता है सम संख्या में पर
कितनों को तूनें विषम कर डाला।

तेरी बिदाई का समय अब आया
कहना 2021 से खुशियां ही लाना
आंसू, दर्द, भय मैं दे आया
तू सबकों सूत समेत लौटाना।

कैदी बनें हम घर में कब से
स्वतंत्रता का अब दिप जलाना
बहुत उम्मीदें आशाएं हैं
तुम किसी को निराश न करना।

स्वर्ग बनाना हैं धरा को अब तो
प्रेम समरसता का बीज हैं बोना
भेदभाव को जड़ से हैं मिटाना
सद्भाव, प्रेम का अलख जगाना।

स्वरचित, मौलिक
जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी