साँवरे: प्रेम की कविता

साँवरे: प्रेम की कविता

साँवरे जब से तुम मेरे मन को भाए,
मेरी दुनिया सारी तुम्हीं मे समाए।

साँवरे जब से तुम मेरे नैनों मे समाए,
मेरी आँखों मे हर पल तुम्हारे ही नजारे छाये।

साँवरे जब से तेरे चरणों मे मन मेरा लगाये,
मेरे चारों धाम वृंदावन कहलाए।

साँवरे जब से जीवन नैया
मैंने तेरे हाथों में थमाए,
मेरी भव बाधा टार के तुमने नैया पार लगाए।

मेरे मन मंदिर में जब से राधा कृष्ण बसाए,
मेरा जीवन मरण तेरे श्री चरणों की आस लगाए।