भावेश और विभूति की कहानी
विभूति की ऑफिस में प्रमोशन की खुशी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कहानी।
विभूति की ऑफिस में प्रमोशन की खुशी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कहानी।
बेनीप्रसाद जी ने होली पर अपने बेटे की याद को पीछे छोड़ते हुए बहू को बेटी मान लिया। अब उनका जीवन रंगीन होगा।