Posted inकविता भक्ति कविता: तुम मार्ग मेरा प्रशस्त करो “तुम मार्ग मेरा प्रशस्त करो” भाव से रचित भक्ति-कविता, जिसमें प्रभु से शीत-हरण, संताप-हरण और मोह-लोभ से मुक्ति की प्रार्थना है। Posted by वीणा मण्डलोई जनवरी 5, 2026
Posted inकविता साँवरे की भक्ति: राधा-कृष्ण चरणों की आस इस कविता में साँवरे के प्रति मन, नैन, चरणों और जीवन की पूर्ण समर्पण-भावना तथा राधा-कृष्ण के चरणों में आशा को व्यक्त किया गया है। Posted by प्रवीणा पगारे शाजापुर जनवरी 5, 2026
Posted inकविता कविता: शांत रस में मुरलीधर कान्हा की आराधना यह कविता “शांत रस” में मुरलीधर कान्हा/गिरधारी के प्रति समर्पण, प्रतीक्षा, विश्वास और अंतिम क्षण की विनती व्यक्त करती है। Posted by जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी जनवरी 5, 2026