50 के बाद अपना आकाश: स्त्रियों की उड़ान

स्त्रियों को बचपन से मिला “सुरक्षित आकाश”, असुरक्षा के घेरे में उड़ान की सीमाएँ, और फिर 50 के बाद अपने सामाजिक दायरे, दोस्तों, चाय पार्टियों, घूमने तथा सजने-संवरने के साथ तृप्त होकर जीने का आत्मकथात्मक अनुभव।

स्वतंत्रता और खुशियों की बिदाई (2020-2021) – जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी

“सन् 2020–2021” के संदर्भ में लिखी गई यह कविता स्वागत, बिदाई, दर्द-आंसू और फिर स्वतंत्रता, प्रेम व सद्भाव के बीज बोने की प्रेरणा देती है। कैद-सी स्थिति से बाहर निकलकर उम्मीदों को संजोने का संदेश इसमें है।