नीता कहती है, जी सुनिए ,होली आ रही है सारे बच्चों के लिए पिचकरियां ले आईए।
रवि कहता है, सब बच्चों से मतलब मैं अपने बच्चों की लाऊंगा ना बीस बच्चे हैं सब मिलाकर सबकी नहीं।
ठीक है आप ना लाइए, मैं ही लेकर आऊंगी ।मुझे याद है होली का दिन जब हमारा परिवार एक हुआ था।छोटी ने तो आते ही परिवार तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी उम्मीद छोड़ बैठे थे सब फिर परिवार एक होगा ।लेकिन जब छोटी पर मुश्किल आई वो दिन होली का कैसे पूरा परिवार साथ था छोटी के दस साल पूरे हो जाएंगे।जहां परिवार साथ होता है वहां होली खेलने का आनंद और हर त्यौहार का अलग ही आनंद होता है।
रवि पछतावा करते हुए कहता है, सही कह रही हो तुम मैं गलत था । पिचकारियां और रंग सारे बच्चों की साथ में लाएंगे हम जहां परिवार एक साथ रहता है वहां की बात ही और है।