नारी ही नारायणी: नारी के अधिकारों की कविता

नारी ही नारायणी: नारी के अधिकारों की कविता

नारी ही नारायणी
जन्म देने वाली जननी
कहीं भी तेरा न हो
अपमान
चाहे न मिले सम्मान

रोज भले ही पूजा
करें न कोई
पर न हो तुझ पर
अत्याचार
मिले न समान अधिकार
पर हो न तेरे हनन
अधिकार
सर्वत्र मिले तुझे
खुला खुशियों का
आसमान।