लेखक

प्रवीणा पगारे

कविता

प्रवीणा पगारे की रचनाएँ

कविता

ना बेचो अपने स्वाभिमान को

अपने स्वाभिमान को न बेचें। कठिनाइयों का सामना करें और अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते रहें। जीवन में विपत्तियों से घबराएं नहीं।

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कविता

नारी ही नारायणी: नारी के अधिकारों की कविता

नारी का सम्मान और अधिकार जरूरी हैं। हर महिला को मिलें समान अधिकार और खुशियों का आसमान।

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