राधेश्याम बाबू का परिवार और दान की सीख
राधेश्याम बाबू ने परिवार के साथ शहर से लौटते समय रेस्टोरेंट में खाना खाया और एक चोकिदार को मदद की।
संग्रह
जीवन, समाज, परिवार और मानवीय अनुभवों पर समुदाय के लेखकों की नई और चुनिंदा कहानियाँ।
राधेश्याम बाबू ने परिवार के साथ शहर से लौटते समय रेस्टोरेंट में खाना खाया और एक चोकिदार को मदद की।
शुभि के मन में भावनाओं का गुबार है।
नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या भोजन के दौरान एक नन्ही बच्ची की हत्या का दिल दहला देने वाला मामला। माता-पिता का दुखद अनुभव।
दिव्य माँ दुर्गा की उत्पत्ति की कथा में असुर रक्तबीज के अत्याचार और देवताओं की सहायता से देवी के रूप में प्रकट होने का वर्णन है।
पूरी रचना पढ़ें : दिव्य तेजस्वी माँ शक्ति की उत्पत्ति की कथा
सुरभी ने प्रवचन सुनने का निर्णय लिया, लेकिन पति प्रशान्त की यादों में खो गई। उसने महसूस किया कि सच्चा संत वही है जो गृहस्थाश्रम में रहकर भी विरक्त भाव रखता है।
विभूति की ऑफिस में प्रमोशन की खुशी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कहानी।
सुशीला अपने बीमार बेटे मिन्टू के साथ अस्पताल से घर लौट रही है। मिन्टू ने माँ से बच्चों में भेदभाव के बारे में पूछा।
एक मां की संघर्ष और बेटे की सफलता की कहानी, जो अचानक एक दुखद मोड़ ले लेती है। क्या सच में कोरोना था या कुछ और? जानें इस भावनात्मक यात्रा में।
बेटी ने पिता से कहा कि उन्हें उसके साथ रहना चाहिए, भले ही समाज क्या कहे। यह एक स्नेहिल पल है।
शीला की कहानी एक विधवा की है जो अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रही है। उसने साहस से अपने बच्चों के लिए नई राहें चुनी हैं।