गीता का सार: जीवन का आधार

गीता का सार: जीवन का आधार

क्योंकि ;
गीता का सार ही है जीवन का आधार…

पूर्ण भक्तवत्सल है वो, जिसने सुनी द्रौपदी की पुकार।
लघुताग्रंथि की गाँठ खोल, तेरे साथ भी है गीताकार।।

कृतकार्य व्यर्थ जाता नही, न मिलता बिनमोल उपहार।
कर्तव्य पथ पर आगे बढ़, कर कर्मण्यता स्वीकार।।

क्योंकि ;
गीता का सार ही है जीवन का आधार…

पालनकर्ता सहायतार्थ है, दे परिश्रम को आकार।
फलाकांक्षा किनारे रख, पहन कर्मठता का हार。。

क्योंकि ;
गीता का सार ही है जीवन का आधार…

निर्बल सा ना तू बन, सबलता से ललकार।
दृढ़ अपना विश्वास कर, निराशा का वर्चस्व नकार。。

क्योंकि ;
गीता का सार ही है जीवन का आधार…

धर्म-अधर्म का भेद जानने, कर गीतामृत का पुष्टाहार।
सर्वस्व समर्पण करके, इक टक गोविंद शरण निहार。。

क्योंकि ;
गीता का सार ही है जीवन का आधार…

विनीता बर्वे
स्वरचित