“विफल मन शापित जीवन” — जीवन के कष्टों पर कविता

“विफल मन शापित जीवन” कविता में नियति की चाल, दुविधा, स्मृतियों का भार और हँसी-आँसू के मिश्रित अनुभवों के माध्यम से जीवन के कष्टों को व्यक्त किया गया है।

नारी: दो नदियाँ—मायका और ससुराल का किस्सा (राजश्री सिकरवार)

यह कविता नारी के दो रूपों—मायका और ससुराल—को दो नदी की धाराओं की तरह चित्रित करती है, जहाँ परिवार के रिश्ते, अपनत्व, ममता और सम्मान मिलकर नारी को सागर-सी गहराई देते हैं।

पुस्तकों का मान: ज्ञान की भव्य शिवाला

पुस्तकों के महत्व पर आधारित यह कविता—कैसे पढ़कर व्यक्ति ज्ञान पाता है, साहित्य का दर्पण बनती हैं पुस्तकें, और गुरूकुल/पाठशाला में ज्ञान का आश्रय बनकर मन को सम्मान देती हैं।

बेटी तुम डरो ना: कोरोना के खिलाफ हिम्मत की कविता

यह कविता बेटी को डरने से मना करती है और कोरोना जैसी वैश्विक चुनौती के बीच स्वच्छता, दूरी, शांति और सहयोग के साथ हिम्मत बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

विधाता की लीला अपरंपार है – कविता

विधाता की लीला अपरंपार—कहीं खुशियां, कहीं गम; कहीं अंधकार, कहीं सूर्य की रोशनी; झूठ-फरेबी और इमानदारी; बारिश-सूखा—अद्भुत संसार पर यह कविता है।