नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या भोजन के लिए गई नन्ही वैष्णवी देर से लौटती है। तलाश के दौरान मंदिर में उसका खून से लथपथ और मृत शव मिलता है। पिता की बदहवास चीखों के साथ बताया जाता है कि आस-पास रहने वाले व्यक्ति ने बच्ची को बहला कर कुकर्म किया।
यह कविता कोमल भावनाओं, कवि-हृदय की कल्पना, प्रकृति की सुंदरता, ममत्व की पुकार और प्रियतम के प्रेम जैसे भावों की मधुर अभिव्यक्ति को शब्दों में पिरोती है।
“श्रीराम जय राम जय जय राम” के समर्पण भाव में लिखी गई यह भक्ति कविता प्रभु श्रीराम के जन्म, तप-त्याग, वनवास, भक्त-कल्याण और सर्वव्यापक स्वरूप का वर्णन करती है।
स्त्रियों को बचपन से मिला “सुरक्षित आकाश”, असुरक्षा के घेरे में उड़ान की सीमाएँ, और फिर 50 के बाद अपने सामाजिक दायरे, दोस्तों, चाय पार्टियों, घूमने तथा सजने-संवरने के साथ तृप्त होकर जीने का आत्मकथात्मक अनुभव।