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प्यार

माँ का प्यार और बच्चों का भेदभाव
Posted inकहानी

माँ का प्यार और बच्चों का भेदभाव

सुशीला अपने बीमार बेटे मिन्टू के साथ अस्पताल से घर लौट रही है। मिन्टू ने माँ से बच्चों में भेदभाव के बारे में पूछा।
Posted by स्वदामिनी पगारे नवम्बर 23, 2022
अपना राग अपना ही गाना
Posted inकविता

अपना राग अपना ही गाना

इस कविता में प्यार और मौसम की खूबसूरती का वर्णन किया गया है, जिसमें मुहब्बत का तराना और दोस्ती का अहसास है।
Posted by प्रवीणा पगारे दिसम्बर 17, 2021

नवीनतम पोस्ट

  • नारी की शक्ति और भूमिका
    श्रीमती प्रवीणा पगारे द्वारा
    नारी जीवन में बाधाओं को पार कर आगे बढ़ती है, परिवारों को जोड़ती है और सभी के सुख-दुख में शामिल होती है।
  • जिंदगी की रोशनी और अंधेरा
    श्रीमती सरिता अजय जी साकल्ले द्वारा
    जिंदगी के उतार-चढ़ाव में रोशनी और अंधेरे का संगम। शमा की तरह जलती हुई, खुशियों और गम के बीच गुजरती।
  • ना बेचो अपने स्वाभिमान को
    प्रवीणा पगारे द्वारा
    अपने स्वाभिमान को न बेचें। कठिनाइयों का सामना करें और अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते रहें। जीवन में विपत्तियों से घबराएं नहीं।
  • राधेश्याम बाबू का परिवार और दान की सीख
    हरिवल्लभ शास्त्री द्वारा
    राधेश्याम बाबू ने परिवार के साथ शहर से लौटते समय रेस्टोरेंट में खाना खाया और एक चोकिदार को मदद की।
  • शुभि और प्रशांत का संघर्ष
    कमला नरवरिया द्वारा
    शुभि के मन में भावनाओं का गुबार है।

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  • नारी की शक्ति और भूमिका
    श्रीमती प्रवीणा पगारे द्वारा
    जनवरी 29, 2023
  • जिंदगी की रोशनी और अंधेरा
    श्रीमती सरिता अजय जी साकल्ले द्वारा
    जनवरी 25, 2023
  • ना बेचो अपने स्वाभिमान को
    प्रवीणा पगारे द्वारा
    जनवरी 10, 2023
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शब्दबोध पर हिंदी कहानियाँ, कविताएँ, और विभिन्न विषयों पर लेख प्रकाशित किए जाते हैं। यह एक बहु-लेखक मंच है जो हिंदी भाषी पाठकों के लिए पढ़ने की सामग्री उपलब्ध कराता है और नवोदित लेखकों को मंच देता है

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