विधाता की लीला

विधाता की लीला

विधाता की लीला अपरंपार है
कहीं खुशियां तो कई गम हजार हैं

कहीं सूर्य की रोशनी तो कई घोर अंधकार है
कहीं जन सैलाब का मेला तो कहीं होता गमगीन इंसान अकेला
प्रभु तेरी लीला का यह कैसा अद्भुत संसार है

कोई राजा तो कहीं रंक तो कहीं संतो की लीला अपरंपार है
विधाता तेरी दुनिया में कहीं झूठ कहीं फरेबी
तो कहीं इमानदारो की होती नैया पार है

कहीं कई कोसो नजर आता पानी तो कहीं बंजर भूमि संसार है
विधाता तेरी दुनिया में कहीं पतझड़ तो कहीं सावन
कहीं बारिश तो कहीं सूखा अद्भुत तेरा संसार है

विधाता तेरी दुनिया में लीला अपरंपार है